क़तर के समुद्र किनारे सूर्यास्त के बीच खड़ी एक भारतीय महिला, जो तन्हाई, यादों और प्रेम की नई उम्मीदों में खोई हुई है।

चलते रहने का नाम ज़िंदगी

क़तर में अकेली ज़िंदगी जी रही मान्या परिवार की जिम्मेदारियों के बीच खुद को भूल चुकी थी। तन्हाई, पुराने प्रेम की स्मृतियाँ और नए रिश्ते के डर के बीच जब जीवन ने उसे प्रेम का दूसरा अवसर दिया, तब उसे समझ आया कि चलते रहने का नाम ही ज़िंदगी है।

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उज्जैन में शुरू हुआ देश का पहला एमबीए टैंपल मैनेजमेंट कोर्स

मंदिरों की व्यवस्था को संभालने तैयार होंगे प्रोफेशनल

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने मंदिरों की बढ़ती आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एमबीए टैंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू किया है। ग्रेजुएट विद्यार्थी इस दो वर्षीय कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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अधिकमास के चलते उज्जैन में जूना अखाड़े की पेशवाई और स्नान यात्रा स्थगित

अधिकमास के कारण थमी गंगा दशहरा की रौनक

उज्जैन में गंगा दशहरा उत्सव के दौरान जूना अखाड़े ने अधिकमास के कारण पेशवाई और नीलगंगा सरोवर में होने वाले स्नान कार्यक्रम स्थगित कर दिए। हालांकि संतों ने मां शिप्रा और चिंतामन गणेश का विधिवत पूजन किया। अब केवल मां गंगा की आरती आयोजित की जाएगी।

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उगते सूरज की रोशनी में आत्मगौरव और राष्ट्रप्रेम के भाव के साथ आगे बढ़ते लोगों का प्रेरक दृश्य, देशभक्ति हिंदी कविता का प्रतीकात्मक चित्र।

आत्मगौरव

आत्मगौरव, राष्ट्रभक्ति और मानव कल्याण के भावों से सजी यह हिंदी कविता देश की शक्ति, संस्कृति और विश्व कल्याण के संकल्प को प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त करती है।

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बिल्कुल तुम्हारी तरह

पति-पत्नी के रिश्ते में तुलना, अपनापन और प्रेम की हल्की नोकझोंक को बयां करती यह भावनात्मक हिंदी लघुकथा बताती है कि हर रिश्ता अपनी अलग पहचान चाहता है।

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अँधेरे से उजाले की ओर बढ़ते व्यक्ति का प्रतीकात्मक दृश्य, आत्मविश्वास और अपनी राह बनाने की प्रेरक भावना को दर्शाती हिंदी कविता।

अपनी राह: अँधेरे से उजाले तक

दूसरों के बनाए रास्तों पर चलने के बजाय अपनी मंज़िल खुद तलाशने का संदेश देती यह प्रेरक हिंदी कविता आत्मविश्वास, संघर्ष और हौसले की ताकत को खूबसूरती से व्यक्त करती है।

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शिर्डी यात्रा और हिंदी साहित्यिक अधिवेशन में शामिल साहित्यकारों और साथियों के साथ बिताए आत्मीय और यादगार पल।

यात्रा, जो लौटकर भी साथ रही

हिंदी साहित्य भारती के शिर्डी अधिवेशन की यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मित्रता, आत्मीयता, जिम्मेदारियों और यादों से भरा जीवन का सुंदर अनुभव बन गई।

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दो भारतीय महिलाओं के बीच अविश्वास और भावनात्मक दूरी को दर्शाता यथार्थवादी दृश्य, टूटा भरोसा और रिश्तों की खामोशी।

खामोशी

वर्षों पुरानी दोस्ती एक सवाल के सामने टूटने लगी—“क्या आपने मेरा सामान देखा था?” शक की उस छोटी-सी दरार ने भरोसे को खामोशी में बदल दिया। यह कहानी रिश्तों में अविश्वास, भावनात्मक दूरी और उन अनकहे दर्दों की है जो लंबे समय तक भीतर रह जाते हैं।

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