रात के आकाश के नीचे अकेला बैठा व्यक्ति, सितारों की ओर देखते हुए, चेहरे पर उदासी और जुदाई का भाव

अधूरा आशियाना

यह ग़ज़ल मोहब्बत, जुदाई और दिल की कश्मकश को बेहद खूबसूरती से बयां करती है। हर शेर में बिछड़ने का दर्द, इंतजार और यादों की टीस झलकती है, जो पाठक को भावनाओं की गहराई में डूबने पर मजबूर कर देती है।

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महिला खिड़की के पास बैठकर कविता संग्रह पढ़ते हुए, चेहरे पर हल्की मुस्कान और आंखों में भावनात्मक गहराई, आसपास गर्म धूप और यादों से भरा शांत वातावरण

उत्तर दो समय: संवेदनाओं और प्रेम का काव्य संसार

उत्तर दो समय’ सविता मिश्रा का एक भावनात्मक कविता संग्रह है, जिसमें दांपत्य प्रेम, स्त्री जीवन, स्मृतियों और संवेदनाओं का सजीव चित्रण मिलता है। यह संग्रह पाठकों को भावनाओं की गहराई में ले जाकर जीवन के अनेक रंगों से परिचित कराता है।

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Asha Bhosle क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर मैच देखते हुए, पृष्ठभूमि में Sachin Tendulkar बल्लेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

स्मृति शेष-क्रिकेट की दीवानी थी आशा भोसले

दिग्गज गायिका Asha Bhosle का क्रिकेट प्रेम भी उतना ही खास रहा है जितना उनका संगीत. ट्विटर जॉइन करते ही उन्होंने सबसे पहले Sachin Tendulkar को फॉलो किया, जबकि बचपन में वह अपनी मां के साथ स्टेडियम में बैठकर पूरे पांच दिनों तक टेस्ट मैच देखा करती थीं.

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लंबे समय बाद मिलते हुए दो लोग, भावनात्मक और रोमांटिक माहौल

यूँ ही तो नहीं

कुछ मुलाकातें सिर्फ इत्तेफ़ाक़ नहीं होतीं, वे किस्मत की लिखी कहानी होती हैं। “यूँ ही तो नहीं” एक ऐसी ही ग़ज़ल है, जो इश्क़ और तक़दीर के अनोखे रिश्ते को उजागर करती है।

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रात के शांत माहौल में खिड़की के पास बैठी लड़की, खामोश मोहब्बत और अनकहे प्यार के भावों में डूबी हुई

खामोश मोहब्बत

कुछ प्यार ऐसे होते हैं जो कभी शब्दों में नहीं ढलते, फिर भी सबसे सच्चे होते हैं। “खामोश मोहब्बत” एक ऐसी ही अनकही भावनाओं की कविता है, जो दिल को छू जाती है।

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तिलमिलाहट: जब संस्कारों की आड़ में छिपा सच सामने आया

तिलमिलाहट

जब एक परिवार में संस्कारों की दुहाई दी जाती है, तभी एक ऐसा सच सामने आता है जो उन सभी मूल्यों को झकझोर देता है। “तिलमिलाहट” एक ऐसी कहानी है जो समाज के दोहरे चेहरे को बेनकाब करती है।

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उज्जैन में पंचक्रोशी यात्रा के दौरान 118 किमी पदयात्रा पर निकले हजारों श्रद्धालु, सिर पर पोटली और “जय श्री महाकाल” के जयघोष के साथ आगे बढ़ते हुए

पंचक्रोशी यात्रा : तय तारीख से पहले ही आस्था का सैलाब

ज्जैन में पंचक्रोशी यात्रा की औपचारिक शुरुआत से पहले ही हजारों श्रद्धालु 118 किमी लंबी पदयात्रा पर निकल पड़े। महाकाल के जयघोष और अटूट आस्था के साथ भक्त कठिन रास्तों को पार करते हुए अपने आध्यात्मिक सफर को पूरा करने में जुटे हैं।

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कीचड़ में खिला कमल का फूल, जो संघर्ष और पवित्र प्रेम का प्रतीक है

कीचड़ का कमल

कीचड़ का कमल” प्रेम और जिम्मेदारियों के बीच फँसी एक स्त्री के अंतर्द्वंद्व को बखूबी उकेरती है। यह कविता बताती है कि हर प्रेम कहानी मुकम्मल नहीं होती कभी परिस्थितियाँ, कभी परिवार और कभी सच का सामना रिश्तों को बदल देता है। यहाँ प्रेम पवित्र है, लेकिन आत्मसम्मान और परिवार की गरिमा उससे भी बड़ा सत्य बनकर उभरते हैं।

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रेगिस्तान में खड़ी एक पारंपरिक वेशभूषा में महिला, गर्म रेत और धूप के बीच संघर्ष और दृढ़ता का प्रतीक

मरु-स्त्री

मरु-स्त्री” एक ऐसी कविता है जो रेगिस्तान की कठोरता के बीच जीती स्त्री के भीतर छिपी अनकही विरासत और पीड़ा को उजागर करती है। यहाँ प्यास केवल एक शारीरिक अवस्था नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक मौन धरोहर है। यह स्त्री रेत की तरह बिखरती नहीं, बल्कि फैलकर अपने अस्तित्व को जीवित रखती है। उसकी हर चाल, हर चुप्पी और हर प्रतीक्षा में संघर्ष, सहनशीलता और जीवन की अदम्य शक्ति झलकती है जो मरुस्थल की सूनी धरती में भी हरियाली की तरह आशा जगाती है

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