‘जहां रिलेशन होगा, वहीं रिएक्शन होगा’
महिदपुर रोड के राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने राग-द्वेष से मुक्त होने, मैत्री भाव अपनाने और जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया.

महिदपुर रोड के राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने राग-द्वेष से मुक्त होने, मैत्री भाव अपनाने और जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया.
माटी से माटी के नाते पर सवाल उठाता मन, पथराई आँखों में छिपी पीड़ा और भीतर सुलगते अहसासों को यह कविता संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है.
यह कविता उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया. उनके शौर्य, त्याग और अमर बलिदान को समर्पित भावपूर्ण रचना.
देश ने हमें आजादी, स्वाभिमान और विकास का अवसर दिया. लेकिन क्या हमने अपने देश को उतना ही लौटाया? स्वतंत्रता दिवस पर नागरिक जिम्मेदारी, स्वच्छता और सच्ची देशभक्ति पर आत्ममंथन करता यह लेख.
शिक्षा महाकुंभ 6.0 में AI और शिक्षा के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी. जानिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के बीच शिक्षक की भूमिका क्यों और कैसे बदलने वाली है.
महिदपुर रोड में चातुर्मास के दौरान 52 तपस्वी सिद्धि तप की आराधना कर रहे हैं। जानिए सिद्धि तप क्या है, इसकी प्रक्रिया और जैन धर्म में इसके आध्यात्मिक महत्व को।
महिदपुर रोड में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा कि भूतकाल एक सपना और भविष्य एक कल्पना है, जबकि वर्तमान ही वास्तविक जीवन है। धर्मसभा में तपस्वियों की प्रभावना और साधार्मिक भक्ति के आयोजन भी हुए।
बरगद केवल एक विशाल वृक्ष नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में आश्रय, ज्ञान, एकता और संस्कार का प्रतीक है। ‘बरगद की छाँव’ कविता इसी वृक्ष के महत्व और बुजुर्गों की छाया को खूबसूरती से जोड़ती है।
वाणी को गए दो साल हो चुके थे, लेकिन सारंग उसे भूल नहीं पाया था। फिर एक दिन उसे 52 लिफाफों वाला एक डिब्बा मिला, जिसे वाणी उसके लिए छोड़ गई थी। हर रविवार खुलने वाला एक लिफाफा उसे धीरे-धीरे फिर से जीना सिखाने लगा।
हरियाली तीज सावन, प्रेम, सुहाग और विश्वास का पर्व है। प्रस्तुत कविता में मेहंदी, झूले, हरी चूड़ियों और शिव-पार्वती के माध्यम से प्रेम और समर्पण की सुंदर अभिव्यक्ति की गई है।