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सुनो ना…

वह कहती है—मत करो मुझे इतना प्यार, क्योंकि हमें पता है कि हमारा साथ अब लंबा नहीं है। फिर भी वह चाहती है कि इन कुछ पलों में वह सब समेट ले—सिंदूरी शाम, तारों से भरी चांदनी रात, भीनी-भीनी हवाएँ और उसका हाथ थामे उसकी मुस्कुराहट। उसकी चाहत बस इतनी है कि जब विदा का समय आए, तो उसकी आँखों में आंसुओं की जगह मुस्कान हो, और उसके जीवन का पिंजरे में बंधा पाखी उसी मुस्कान से मुक्त हो सके।

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स्त्री मन

एक स्त्री का मन बेहद संवेदनशील और मजबूत होता है। किसी के चले जाने का एहसास उसे अंदर से हिला देता है, लेकिन वही स्त्री अपनी पीड़ा को सहकर अपने अपनों के लिए जीवित रहती है। अकेलेपन और खामोशियों के बीच भी वह निरंतर प्रयास करती है, असंभव को संभव बना देती है, और छल जाने पर भी दूसरों के लिए दुआएँ देती है। स्त्री का मन भावनाओं और बलिदान का प्रतीक है।

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रिश्तों का जहर: क्यों टूट रहे हैं पवित्र बंधन

पति-पत्नी का रिश्ता भारत में सबसे पवित्र और गहरा माना जाता है, लेकिन आज समाज में यह रिश्ता नफ़रत, संदेह और हिंसा का केंद्र बनता जा रहा है। पति द्वारा पत्नी पर अत्याचार, पत्नी द्वारा पति की हत्या, दहेज, संपत्ति, विवाहेतर संबंध और संवाद की कमी—ये सभी कारण रिश्तों को ज़हरीला बना रहे हैं। मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसी घटनाएँ लगातार सामने आती हैं, जो रिश्तों की पवित्रता और समाज की नींव पर सवाल उठाती हैं।

समाधान संवाद, काउंसलिंग, कानूनी जागरूकता, संस्कार और धैर्य में निहित है। प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान ही वह रास्ता है जिससे पति-पत्नी के रिश्ते सुदृढ़ और खुशहाल बन सकते हैं। अगर यह समझ नहीं आया, तो समाज में “नीले ड्रम” और “ज़हर” जैसी खौफनाक घटनाएँ लगातार दोहराई जाएँगी।

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जो ठहर गए, वही असली कहानी हैं

सत्तर वर्ष की उम्र में जीवन ने सिखाया कि लोग आते-जाते रहते हैं, कुछ बसंत की तरह उजास और उम्मीदें लाते हैं, कुछ शीत की आँधी की तरह चले जाते हैं। युवावस्था में हर विदाई पीड़ादायक लगती थी, लेकिन समय और अनुभव ने यह समझाया कि जो लोग आपके लिए बने हैं, वे हमेशा लौटकर आते हैं। असली खुशी और जीवन की कहानी उन लोगों में है जो आपके साथ ठहरते हैं, आपकी आत्मा को समझते हैं और बिना किसी जोर-जबरदस्ती के आपके जीवन में बने रहते हैं।

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ब्लडी मून

ब्लडी मून का दृश्य अद्भुत था। शाम होते ही याद आया कि आज चंद्रग्रहण है और चाँद धीरे-धीरे लाल होने लगेगा। महीनों से धूल खाई कैमरे की बॉडी और लेंस को तैयार किया गया, लेकिन वास्तविक लालिमा को देखने और कैद करने के लिए धैर्य और जुगाड़ की ज़रूरत पड़ी। छत पर पहुँचकर, चाँदनी की बिखरी रोशनी और धीरे-धीरे ग्रहण में ढकता चाँद, एक रहस्यमय और मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।

पूरे ग्रहण और लाल चाँद को देखने के बीच, पारिवारिक जीवन, तकनीकी सीमाएँ और डिजिटल युग की जुगाड़ कहानी भी साथ चल रही थी। हाथ में कैमरा, iPhone शॉट्स और तख़्त पर टिकाई डंडी की मदद से आखिरकार कुछ तस्वीरें इतिहास में कैद हो गईं। यह केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धैर्य, तैयारी और अद्भुत दृश्य का मिश्रण था।

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कमियाँ हर इंसान में होती हैं, लेकिन बदनाम सिर्फ चाँद होता है. यह कविता चाँद की खूबसूरती, उसकी चाँदनी और इंसानी सोच की गहराई को बेहद भावुक अंदाज़ में प्रस्तुत करती है.

चांद में दाग

चाँद में दाग़ जरूर होता है, लेकिन मानव भी कभी पूर्ण नहीं होता। कमियाँ सभी में होती हैं, फिर भी केवल चाँद ही बदनाम माना जाता है। उसकी खूबसूरती, गुण और चाँदनी की रौशनी, अंधेरे को काट देने की क्षमता, पूर्णमासी की छटा—सब कुछ अद्भुत है। अमावस की रात को उसकी कमी महसूस होती है, लेकिन आसमान में उसकी सुंदरता और प्यारा प्रभाव सबको भाता है। अक्सर लोग केवल दोष देखते हैं, जबकि अगर हम अपने गिरेबान में झाँकें, तो पता चलता है कि हमारी खुद की कमियाँ भी उतनी ही स्पष्ट हैं।

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माँ का पीतल का संदूक

माँ का पीतल का संदूक—छोटा, पर सोने-सा चमकता। उसमें सहेजे गए गहने, सिक्के, पान और यादें पीढ़ियों की परंपरा और स्नेह का दीप हैं। बचपन से मुझे खींचने वाला यह संदूक अब मेरी नई यादों और ज्वेलरी का घर बन गया है।

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पिंक फ्रॉक

पिंकी की ज़िद नई पिंक फ्रॉक की थी, लेकिन जब उसने अपनी सहेली मुन्नी को फटे-पुराने कपड़ों में देखा तो उसका मन बदल गया। उसने अपनी सुंदर फ्रॉक मुन्नी को दे दी। उस पल उसे समझ आया कि असली खुशी पाने में नहीं, बाँटने में है।

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चांद को ग्रहण

चाँद को ग्रहण लगने की बात केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भावनाओं और विश्वासों से जुड़ी है। प्रेम का प्रतीक यह चाँद कभी उपहास का पात्र नहीं बन सकता। सच तो यह है कि चाँद को ग्रहण नहीं, बल्कि नज़र लगती है—क्योंकि हर पूर्णिमा को पूरी दुनिया उसे निहारती है, उसकी सुंदरता को नज़र भर-भरकर देखती है। यही कारण है कि कभी वह बादलों में छिप जाता है, तो कभी लोग उसे नज़र उतरने के लिए दुआओं और टोटकों में बाँध देते हैं। वास्तव में चाँद सदा निर्मल है, ग्रहण तो हमारी धारणाओं का है।

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सूरीनाम हिन्दी परिषद् का 48वाँ वार्षिकोत्सव उत्साहपूर्वक संपन्न

हिन्दी भाषण प्रतियोगिता व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन सूरीनाम हिन्दी परिषद् का 48वाँ स्थापना दिवस एवं हिन्दी पखवाड़े का शुभारंभ पाँच सितंबर को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर “हिन्दी भाषण प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी वक्तृत्व कला से श्रोताओं को प्रभावित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री करन जागेसर…

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