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नारी शक्ति

नारी शक्ति का प्रतीकात्मक चित्र, जिसमें बेटी, माँ और दुर्गा के रूप में महिला की शक्ति, सम्मान और आत्मविश्वास दर्शाया गया है।

डॉ. संगीता पांडे

सृष्टि की जो मूल धार है,

जीवन का जो प्रेम आधार है,

केवल कोमलता ही नहीं उसकी पहचान,

वो तो शक्ति का स्वरूप अपार है।

जब बेटी बन कर आँगन में मुस्काए,

तो घर का हर कोना चहक जाए।

माँ बन कर जो आंचल में छुपाए,

तो हर दुःख और दर्द दूर हो जाए।

रिश्तों को जोड़ती वो एक डोर है,

उसकी हिम्मत में छुपा नया भोर है।

पार्वती सा रूप है, दुर्गा सा स्वरूप,

उसकी गर्जना में एक अलग ही शोर है।

अन्नपूर्णा बनकर सबको खिलाती है,

लक्ष्मी बनकर घर को सजाती है।

ज़िम्मेदारी हो या फिर कोई चुनौती,

हर मोड़ पर वो राह दिखाती है।

आकाश की ऊँचाइयों को छू रही है,

हर क्षेत्र में अपना नाम बना रही है।

अब रुकेगी, झुकेगी कभी,

वो अपना भविष्य खुद लिख रही है।

समान हो आदर, समान हो सम्मान,

तभी बनेगा देश हमारा महान।

नारी शक्ति को प्रणाम है मेरा,

वही है इस जगत की शान !

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One thought on “नारी शक्ति

  1. बहुत ही प्रेरणादायक रचना।
    नारी की शक्ति और गरिमा का अद्भुत चित्रण किया है।
    हर शब्द सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास जगाता है।

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