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सितारों से सजी लाल चुनरी और स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत माँ भवानी की प्रतिमा।

सितारों से सजी है जो…

माँ भवानी के दिव्य स्वरूप, सितारों से सजी चुनरी, अलौकिक शृंगार और भक्तों की अटूट श्रद्धा का सुंदर वर्णन करती यह भक्ति कविता माँ के चरणों में समर्पित भावनाओं की अभिव्यक्ति है। माँ की महिमा का गुणगान करती इन पंक्तियों में सुख, विश्वास, आस्था और मंगल की कामना झलकती है।

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अस्पताल के प्रतीक्षालय में अपनी छोटी बच्ची को तलाशती चिंतित माँ।

वह दस मिनट… जो जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगी

अस्पताल की भीड़ में खेलती दो साल की बच्ची अचानक गायब हो गई। एक माँ के लिए वे दस मिनट किसी भयावह सपने से कम नहीं थे। यह सच्चा अनुभव बच्चों की सुरक्षा, सतर्कता और अनजान लोगों पर भरोसा करने से जुड़े जरूरी सवाल उठाता है।

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खिड़की के पास बैठी स्त्री, जिसकी आँखों में अधूरे सपनों और पुरानी यादों की उदासी है।

फिर वही सपना

कुछ ख़्वाब आँखों में पलते हैं, कुछ दहलीज़ तक आकर लौट जाते हैं। ‘फिर वही सपना’ एक ऐसी भावुक कविता है, जिसमें अधूरी ख़्वाहिशों, अतीत की परछाइयों और बिखरते सपनों की पीड़ा को सुई-धागे के सुंदर रूपक के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।

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राघव और रिद्धिमा की प्रेम कहानी भरोसे की डोर का भावनात्मक दृश्य

भरोसे की डोर

क्या प्रेम में किसी को खो देने का डर जरूरी है? राघव और रिद्धिमा की कहानी बताती है कि रिश्ते केवल वादों से नहीं, बल्कि ईमानदारी, संवाद, सम्मान और भरोसे से मजबूत बनते हैं।

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पुराने इंदौर की सड़क पर खड़ी काइनेटिक होंडा और पत्रकारिता के दिनों की यादें

मुन्ना से कीर्ति राणा

भास्कर इंदौर की सिटी डेस्क की जिम्मेदारी मिलने से लेकर नई काइनेटिक होंडा और सांप्रदायिक तनाव के बीच रिपोर्टिंग तक, यह संस्मरण पत्रकारिता के उन दिनों की यादें समेटता है, जब हर खबर के साथ जोखिम और जिम्मेदारी जुड़ी होती थी।

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श्वेत वस्त्र धारण किए जपमाला और कमंडल के साथ माँ ब्रह्मचारिणी का दिव्य स्वरूप

हे माँ ब्रह्मचारिणी

नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना और उनकी कठोर तपस्या को समर्पित यह भक्तिमय कविता श्रद्धा, संकल्प और समर्पण का संदेश देती है। पढ़िए माँ के दिव्य स्वरूप और महिमा का काव्यात्मक गुणगान।

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मायके की याद और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच खड़ी एक भारतीय महिला

औरत का मायका: सामने होकर भी कितना दूर

बेटी से बहू, पत्नी और माँ बनने के सफर में औरत कब अपनी इच्छाओं को पीछे छोड़ देती है, उसे पता ही नहीं चलता। मायका सामने होकर भी दूर रह जाता है। यह कविता स्त्री की जिम्मेदारियों, मायके की यादों और उसके हिस्से के सुकून की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

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आत्मविश्वास और साहस के साथ आगे बढ़ती आधुनिक भारतीय लड़कियाँ

ये आजकल की लड़कियाँ

‘ये आजकल की लड़कियाँ’ एक ऐसी कविता है, जो पुरानी और नई पीढ़ी की सोच के अंतर को सामने लाती है। यह कविता आज की लड़कियों के आत्मविश्वास, साहस और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता को स्वर देती है। अब लड़कियाँ चुपचाप सब कुछ सहने के बजाय सही और गलत के बीच फर्क करना जानती हैं। वे बराबरी का हक माँगती ही नहीं, बल्कि अपने दम पर हासिल भी करती हैं। यह कविता बदलते दौर की उस नारी शक्ति को समर्पित है, जो किसी की सोच या बंदिशों से नहीं डरती और अपने सपनों के साथ आसमान छूने का हौसला रखती है।

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राष्ट्रीय कवि संगम नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी में उपस्थित साहित्यकार

राष्ट्रीय कवि संगम, नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी संपन्न

राष्ट्रीय कवि संगम, नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी 9 अक्टूबर को केंद्रीय विहार, सीवुड्स में आयोजित हुई। डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद गांई की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में साहित्यकारों ने काव्य पाठ कर राष्ट्र जागरण में कलमकारों की भूमिका पर जोर दिया।

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चाँदनी रात में प्रियतम की प्रतीक्षा करती एक युवती

प्रेम मिलन

प्रेम में मिलन की चाह और विरह की पीड़ा दोनों का अपना अलग संसार होता है। ‘प्रेम मिलन-गीत’ में प्रियतम की प्रतीक्षा करती प्रेमिका अपने मन की व्याकुलता, अधूरेपन और मिलन की तीव्र अभिलाषा को शब्द देती है। यह गीत प्रेम की मिठास और जुदाई की कसक को भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त करता है।

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