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सिंह पर सवार माँ दुर्गा का दिव्य स्वरूप, हाथों में त्रिशूल और खड्ग

आदि शक्ति जगदंबे भवानी

सिंह पर सवार, हाथों में त्रिशूल और खड्ग धारण करने वाली माँ जगदंबा की महिमा का सुंदर वर्णन करती यह कविता भक्तिभाव और श्रद्धा से परिपूर्ण है। माँ दुर्गा के दिव्य स्वरूप, शक्ति, करुणा और शरणागतों की रक्षा करने वाली कृपा को समर्पित यह रचना भक्तों के मन में आस्था का संचार करती है।

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मंदिर के प्रांगण में दो महिलाओं की पहली मुलाकात और आत्मीय बातचीत

मंदिर की वो पावन मुलाकात

कभी-कभी जीवन में कुछ मुलाकातें संयोग से होती हैं, लेकिन धीरे-धीरे अनमोल रिश्तों में बदल जाती हैं। मंदिर में हुई एक छोटी-सी मुलाकात से शुरू हुई यह दोस्ती समझदारी, निस्वार्थ सहयोग और अटूट भरोसे की ऐसी मिसाल है, जो याद दिलाती है कि सच्चे रिश्ते उम्र से नहीं, दिल और नीयत से बनते हैं।

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आधे उजाले और आधे अँधेरे में खड़ा नक़ाब पहने व्यक्ति, दोहरे चेहरे का प्रतीक

चेहरे और नक़ाब

हर चमकती चीज़ रोशनी नहीं होती और हर मीठी ज़ुबान के पीछे नेक इरादे नहीं होते। यह कविता उन चेहरों की हक़ीक़त सामने लाती है, जो सच का लबादा ओढ़कर झूठ, छल और बनावटी अपनाइयत के पीछे अपनी असलियत छिपाए बैठे हैं।

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खिड़की के पास बैठा व्यक्ति खुली डायरी और किताब के साथ अपने शौक के बारे में सोचता हुआ

कोठरी में कैद अल्हड़ मन

जीवन की भागदौड़ में हम दूसरों की जिम्मेदारियाँ निभाते-निभाते अपने शौक और इच्छाओं को भुला देते हैं। ‘कोठरी में कैद अल्हड़ मन’ हमें याद दिलाता है कि किताबें, यात्राएँ, संगीत, दोस्ती और प्रकृति से जुड़ाव जीवन में नई ऊर्जा भर सकते हैं। आखिर खुद के लिए जीना भी जीवन की एक जरूरी शर्त है।

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सूखी धरती पर उगता एक छोटा हरा अंकुर, जीवन और संवेदनाओं की नमी का प्रतीक

थोड़ी सी नमी बाकी रहने दो

जब मन से संवेदनाएँ सूखने लगें और जीवन से प्रेम, करुणा तथा ममता कम होने लगे, तब थोड़ी-सी नमी बचाए रखना जरूरी हो जाता है। यह कविता इंसानियत और प्रकृति के अस्तित्व को बचाने के लिए मन में संवेदनाओं की नमी बनाए रखने का संदेश देती है।

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कथक नृत्यांगना के पैरों में बँधे घुँघरू

घुँघरू

घुँघरुओं की झंकार केवल नृत्य का संगीत नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, विरह और मन के अनगिनत भावों की अभिव्यक्ति भी है। प्रस्तुत कविता में घुँघरुओं की इसी भावपूर्ण दुनिया को शब्दों में पिरोया गया है।

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बात करते समय मां का चेहरा छूता हुआ छोटा बच्चा

बात करते-करते बच्चा आपका चेहरा क्यों छूने लगता है ?

क्या आपका बच्चा बात करते समय बार-बार आपके गाल, नाक या भौंहों को छूता है? बचपन की यह छोटी-सी आदत प्यार जताने, जिज्ञासा, अपनापन या माता-पिता का ध्यान पाने से जुड़ी हो सकती है। जानिए इस व्यवहार के संभावित कारण और बच्चे को प्यार के साथ व्यक्तिगत सीमाएं सिखाने का सही तरीका।

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पितृपक्ष के दौरान घर की छत पर रखे भोजन को खाते कौए का दृश्य

पितृपक्ष में कौओं को ही क्यों याद करते हैं ?

पितृपक्ष में कौओं को भोजन कराने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, पारिवारिक संस्कारों, करुणा और जीव-जंतुओं की देखभाल का संदेश भी देती है। जानिए इस सदियों पुरानी परंपरा के पीछे छिपे सांस्कृतिक और मानवीय अर्थ।

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पने बेटे का हाथ थामे भावुक बुजुर्ग भारतीय पिता

पापा, कभी तो कहिए… मुझे तुमसे प्यार है !

पिता पूरी जिंदगी बच्चों की खुशियों और भविष्य के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन अपने प्रेम को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। यह भावुक लेख पिता और संतान के बीच अनकहे प्यार, अधूरी इच्छाओं और समय रहते भावनाएं जताने की अहमियत को समझाता है।

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पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में पुरानी क्रीम और काले रंग की लूना के साथ युवा पत्रकार

मुन्ना से कीर्ति राणा

पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में क्रीम-काले रंग की लूना सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि जिंदगी की साथी थी। नईदुनिया में प्रशिक्षु पत्रकार के पद के लिए इंटरव्यू देने के बाद भास्कर से लूना जमा कराने का नोटिस मिला। इसके बाद शुरू हुआ नौकरी, संघर्ष और नई जिम्मेदारियों का ऐसा सफर, जिसमें लूना से लेकर सेकंडहैंड चेतक तक कई यादें जुड़ गईं।

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