Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
सावन में मिठाई की दुकान पर घेवर और फेनी देखकर मायके और माँ को याद करती भावुक महिला

राखी, फेनी और माँ 

सावन की फुहारों के साथ सुमन को अपने मायके और माँ की याद सताने लगती है। राखी, फेनी और घेवर से जुड़ी छोटी-सी याद उसे उन रिश्तों तक ले जाती है, जो अब उसके जीवन में नहीं हैं।

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सीता और राम के प्रेम, विरह और भावनात्मक संघर्ष को दर्शाती यथार्थवादी साहित्यिक छवि

मैं सिया सी… और तुम राम

प्रेम जब विश्वास मांगता है और रिश्ते परीक्षा लेने लगते हैं, तब सिया के मन में राम से कई अनकहे सवाल जन्म लेते हैं। यह कविता उसी प्रेम, पीड़ा, विरह और स्त्री के आत्मसम्मान की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

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मीरा तुम कहाँ हो? एक अधूरी दोस्ती और आदिवासी लड़की के संघर्ष की मार्मिक कहानी

मीरा तुम कहाँ हो

तीन दशक पहले मिली एक आदिवासी लड़की मीरा, जो पढ़ाई में बेहद होशियार थी और जीवन में आगे बढ़ना चाहती थी। लेकिन परिस्थितियों ने उसकी राह रोक दी। वर्षों बाद हुई एक मुलाकात ने दोस्ती, सपनों और बिछड़ने की ऐसी कहानी छोड़ दी, जिसका सवाल आज भी कायम है मीरा तुम कहाँ हो?

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आम आदमी

आम आदमी

आम आदमी एक साधारण शब्द जरूर है, लेकिन उसके भीतर असाधारण हौसला, संवेदनशीलता, उम्मीद और इंसानियत छिपी होती है। यह कविता उसी आम आदमी के बड़प्पन को सलाम करती है।

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मित्र

“मित्रता सिर्फ साथ चलने का नाम नहीं, बल्कि मुश्किलों के रास्ते में एक-दूसरे का हाथ थामे रखने का नाम है। ‘निभाना सीखो’ दोस्ती, विश्वास, हौसले और जिंदगी को खुलकर जीने का संदेश देती एक भावपूर्ण कविता है।”

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ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए अपनी प्रेमिका को याद करता एक युवक

यादों की खुशबू

तीन दिन की मुलाक़ात… और उम्रभर साथ चलने वाली खुशबू। राघव और रिद्धिमा की यह प्रेम कहानी बताती है कि कुछ रिश्ते दूरी से नहीं, यादों से जीते हैं। विदाई के बाद भी रिद्धिमा की महक राघव की साँसों, उसके कपड़ों और उसकी स्मृतियों में बसी रहती है। हर हवा का झोंका उसे फिर उसी पल में लौटा देता है जहाँ प्रेम ने पहली बार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। यह कहानी बताती है कि प्रेम कभी सिर्फ़ शब्दों में नहीं रहता, वह खुशबू बनकर जीवनभर साथ चलता है।

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सावन की बारिश में अपने प्रिय का इंतजार करती एक युवती

सावन को आने दो

कुछ भाव ऐसे होते हैं जो शब्दों में नहीं ढल पाते, लेकिन सावन की पहली बारिश उन्हें आवाज़ दे देती है। “सावन को आने दो” ऐसी ही एक भावुक कविता है, जहाँ अनकहे जज़्बात बादलों के साथ उमड़ते हैं, बारिश की हर बूंद प्रेम का संदेश बन जाती है और मन किसी अपने की प्रतीक्षा में भीग उठता है। यह कविता प्रेम, प्रतीक्षा और मानसून की मधुर अनुभूतियों को बेहद संवेदनशीलता से व्यक्त करती है।

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अच्छी औरत: समाज की सोच, घरेलू हिंसा और एक स्त्री की अनकही कहानी

अच्छी औरत

एक नई दुल्हन, जो कभी घूँघट में सिमटी रहती थी, घरेलू हिंसा, अपमान और जीवन की क्रूर परिस्थितियों से गुजरते-गुजरते ऐसी दुनिया में पहुँच जाती है जहाँ समाज उसे “अच्छी औरत” मानने से इनकार कर देता है। यह मार्मिक कविता केवल एक स्त्री की कहानी नहीं, बल्कि उन सामाजिक मानदंडों पर सवाल है जो परिस्थितियों को नहीं, केवल परिणामों को देखते हैं।

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आईसीयू का दर्द

आईसीयू का बंद दरवाज़ा

आईसीयू का बंद दरवाज़ा केवल मरीज को ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार को एक कठिन परीक्षा से गुज़ारता है। भीतर मशीनों की बीप-बीप और बाहर अपनों की थमी हुई सांसों के बीच चलने वाले इस दोतरफा संघर्ष की मार्मिक कहानी।

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संघर्ष, हौसला और सफलता की प्रेरक हिंदी कविता

खुद को पाया, खुद को ही खोकर

ज़िंदगी का हर संघर्ष हमें कुछ नया सिखाता है। ठोकरें, असफलताएँ और कठिन रास्ते इंसान को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे और मज़बूत बनाने के लिए आते हैं। “खुद को पाया, खुद को ही खोकर” एक ऐसी प्रेरणादायक हिंदी कविता है, जो हौसले, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास की कहानी कहती है। यह रचना बताती है कि मंज़िल तक वही पहुँचता है, जो दर्द, काँटों और तूफ़ानों से हार मानने के बजाय उनसे सीखकर आगे बढ़ता है।

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