सुनो दोस्त..
दोस्ती सिर्फ साथ चलने का नाम नहीं, बल्कि एक ऐसा रिश्ता है जहाँ खुशियाँ बढ़ाई जाती हैं और दुख बाँट दिए जाते हैं। “सुनो दोस्त…” एक भावनात्मक कविता है, जो निःस्वार्थ प्रेम, विश्वास और उस दोस्ती को समर्पित है जिसमें कोई स्वार्थ नहीं, सिर्फ अपनापन होता है।
