
मौसमी चंद्रा, प्रसिद्ध लेखिका
सबसे खूबसूरत होती है संघर्ष करती स्त्री!
उनके सौंदर्य में सौम्यता नहीं,
ठहरे होते हैं दृढ़ संकल्प!
भाव-भंगिमा में हार नहीं होती,
होती है अदम्य जिजीविषा!
असंख्य पीड़ाओं को वह साध लेती है
अपनी अविराम चुप्पी में!
कंठहार, बालियाँ या रेशमी वस्त्र नहीं,
उसे शोभित करता है संघर्ष का वलय!
क्योंकि संघर्षिणी स्त्री स्वयं में होती है
एक जीवंत महाकाव्य!

एकदम सही