जुन्नर (महाराष्ट्र) से गुजरात तक तेंदुओं का बड़ा “मूवमेंट” होने वाला है। केंद्रीय प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण ने 19 दिसंबर को महाराष्ट्र के जुन्नर वन विभाग के 50 जंगली तेंदुओं को गुजरात के ग्रीन प्राणी शास्त्रीय बचाव और पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित करने की मंजूरी दी है। इस निर्णय से जुन्नर वन क्षेत्र के मानव-वन्यजीव संघर्ष में राहत मिलने की उम्मीद है।
जुन्नर वन क्षेत्र में हाल ही में मानव-तेंदुआ संघर्ष में वृद्धि हुई है। इस वर्ष अप्रैल से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद वन विभाग ने जुन्नर, शिरूर, आंबेगांव और खेड़ तहसीलों में बड़े पैमाने पर तेंदुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया। पिछले दो महीनों में विभाग ने कुल 120 तेंदुओं को पकड़ा, जिनमें से 50 तेंदुए माणिकडोह तेंदुआ बचाव केंद्र में हैं। बाकी 70 तेंदुओं को अस्थायी पिंजरों में रखा गया है।
माणिकडोह तेंदुआ बचाव केंद्र की क्षमता केवल 45 तेंदुओं की है। यह केंद्र वर्तमान में अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है, इसलिए वन विभाग ने गुजरात के जामनगर प्राणी संग्रहालय अधिकारियों से संपर्क किया और अक्टूबर में केंद्रीय प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण को 50 तेंदुओं के स्थानांतरण का प्रस्ताव भेजा।
क्लेमेंट बेन, सदस्य सचिव केंद्रीय प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण के अनुसार, तकनीकी समिति ने प्रस्ताव की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के अनुसार 50 तेंदुओं में 20 नर और 30 मादा शामिल हैं।
स्थानांतरण की प्रक्रिया चरणबद्ध होगी
सहायक वन संरक्षक स्मिता राजहंस ने बताया कि गुजरात के केंद्र में इन तेंदुओं को समायोजित करने के लिए क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। इसलिए तेंदुओं का स्थानांतरण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। वन विभाग का कहना है कि यह कदम न केवल केंद्र की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि जुन्नर और आसपास के गांवों में मानव-तेंदुआ संघर्ष को भी कम करेगा।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सुरक्षित पुनर्वास केंद्र न केवल तेंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाने में भी मदद करते हैं।
इस प्रक्रिया के शुरू होते ही जुन्नर के लोग राहत की सांस लेंगे, और तेंदुओं के लिए भी नए केंद्र में सुरक्षित जीवन की राह खुलेगी।
