तुम लौट आओ…
यह भावपूर्ण हिंदी कविता प्रेम और प्रतीक्षा की उस कोमल अनुभूति को व्यक्त करती है, जहाँ किसी प्रिय के लौट आने की उम्मीद जीवन को फिर से संवार देने का विश्वास बन जाती है। हर पंक्ति में विरह, चाहत और मिलन की मधुर आकांक्षा झलकती है।

यह भावपूर्ण हिंदी कविता प्रेम और प्रतीक्षा की उस कोमल अनुभूति को व्यक्त करती है, जहाँ किसी प्रिय के लौट आने की उम्मीद जीवन को फिर से संवार देने का विश्वास बन जाती है। हर पंक्ति में विरह, चाहत और मिलन की मधुर आकांक्षा झलकती है।
यह कविता जीवन को एक रंगमंच के रूप में प्रस्तुत करती है, जहां हर व्यक्ति एक किरदार निभा रहा है। कवयित्री स्वयं को मंच पर उपस्थित बताती है, जहां वह अपने भावों, पीड़ाओं और प्रेम को खुलकर जी रही है, जबकि उसका प्रिय नेपथ्य में रहकर अपने अस्तित्व को छिपाए हुए है।