भावपूर्ण कविता
ऐ अजनबी सांवरे
यह कविता प्रेम, पहचान और आत्मिक संवाद की कोमल अभिव्यक्ति है। ‘अजनबी’ और ‘सांवरे’ के प्रतीकों के माध्यम से कवि मन की उस यात्रा को शब्द देता है, जहाँ नादानी, तलाश और समर्पण एक-दूसरे में घुल जाते हैं। प्रेम यहाँ केवल सांसारिक नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मा का स्वर बन जाता है। मन की भटकन, चित की चोरी और ऋतु प्रीत की सुगंध के साथ यह रचना पाठक को भीतर तक छूती है और उसे अपने ही भावलोक में ले जाती है।
विदाई गीत
आज विदाई का वह क्षण है, और मैं यहाँ अकेला खड़ा हूँ, यह सोचते हुए कि क्या कहूँ और शब्दों का सही चयन कैसे करूँ। मेरी आँखें भर आती हैं जब मैं अपने विद्यालय में पहले दिन की यादों को याद करता हूँ—वो उत्साह, वो नर्वसनेस, और दोस्तों के साथ की छोटी-छोटी शरारतें, जैसे क्लास में बंक मारना या किसी का टिफ़िन चुपके से ले जाना। वे निश्चिन्त, हँसी-खुशी भरे पल, दोस्तों के साथ की मस्ती, टीचरों को चिढ़ाना, खेल के मैदान और प्रार्थना की ध्वनि—ये सभी यादें हमेशा मेरे दिल में रहेंगी।
