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आकांक्षा

प्रभु दर्शन की चाह में तड़पती आत्मा आकांक्षा कविता

डाॅ कृष्णा जोशी, इन्दौर (मध्यप्रदेश)

मैं तरसती रही दिन प्रतिदिन प्रभु,

कभी दर्शन तो दे दो मुझे हु-ब-हु।

भक्त भगवान बिन एक पल ना रहा,

लाख जीवन में आता हर एक दुःख सहा।

फैसले हर घड़ी क्यूं बदलता है दिल,

एक दिन पा ही लेंगे हम अपना साहिल।

तर्क शक्ति मुझे विद्वता से मिलें,

दीप की ज्योति सी मेरी आभा रहें।

अच्छे व्यवहार की सब प्रशंसा करें,

क्रूरता सहम कर सभी है डरे।

कामना पूर्ण सबकी तो होती नहीं,

उम्र अरमान की छोटी होती नहीं।

बस कभी संकटों से ना हो सामना,

कर लो स्वीकार कृष्णा की ये प्रार्थना।

साथ मेरे रहो पल-विपल है प्रभु,

कभी दर्शन तो दे दो मुझे हु-ब-हु।

मैं तरसती रही दिन प्रतिदिन प्रभु,

कभी दर्शन तो दे दो मुझे हु-ब-हु।।

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