Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

शब्दघात

“शब्दघात” एक आध्यात्मिक और चिंतनशील कविता है, जो शब्दों की ताकत, मीठे व्यवहार, अच्छे कर्मों और इंसानियत का संदेश देती है। रचना याद दिलाती है कि जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए ऐसे कर्म करें जो मृत्यु के बाद भी लोगों के दिलों में हमें जीवित रखें।

Read More
मैली चुनरिया ओढ़े ग्रामीण भारतीय महिला आत्मचिंतन और पश्चाताप की भावपूर्ण अवस्था में खड़ी हुई।

चुनरिया हो गई मैली रे…

“चुनरिया हो गई मैली रे” एक भावपूर्ण कविता है जो जीवन के संस्कारों, मोह-माया, आत्मग्लानि और नैतिक चेतना का मार्मिक चित्रण करती है। पढ़ें यह संवेदनशील काव्य रचना।

Read More
मोर मुकुट धारण किए भगवान श्रीकृष्ण, हाथ में बांसुरी, वृंदावन के कुंजों में राधा और गोपियों के साथ दिव्य रासलीला का मनमोहक दृश्य।

श्री कृष्ण

ज बिहारी श्रीकृष्ण की दिव्य महिमा, राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और वृंदावन की रासलीला का सुंदर काव्यात्मक चित्रण। माखनचोर नंदलाल की बाल लीलाओं से लेकर उनके मनमोहक स्वरूप तक, यह कविता भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद का मधुर संदेश देती है। श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और समर्पण से ओतप्रोत यह रचना भक्तों के हृदय को भाव-विभोर कर देती है।

Read More
वीणा धारण किए श्वेत कमल पर विराजमान माँ सरस्वती का दिव्य और शांत स्वरूप।

सरस्वती वंदना

हे स्वामिनी, ज्ञानदायिनी, भक्ति-प्रकाश उर में भर दे। माँ सरस्वती से ज्ञान, विवेक, संयम और शुद्ध लेखनी का वरदान माँगती यह सुंदर वंदना मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

Read More

कृष्ण और कृष्ण प्रिया

वह स्वयं को हर रूप में देखता है वामन, नरसिंह, माधव, नंदलाल एक ही सत्ता, अनेक लीलाएँ। और उसके सामने खड़ी है ‘कृष्ण प्रिया’, जिसकी पहचान केवल उसकी भक्ति है। ग्वालिन के वेश में, आँखों में प्रेम और अधरों पर पुकार लिए, वह बस इतना चाहती है कि कृष्ण नाम में खो जाए। उसके लिए वही तिलक है, वही श्रृंगार, वही जीवन। अंत में उसकी एक ही विनती रह जाती है. “जब मैं कहूँ… आओ न स्वामी, तो तुम आ जाना।”

Read More
नारी शक्ति पर कविता: अग्नि-सी आँखें, वज्र-सा संकल्प

भीतर की दुर्गा: एक मौन युद्ध

यह कविता नारी के बाहरी साहस और भीतर की आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है, जहाँ युद्ध बाहर नहीं बल्कि मन के अंधकार से होता है और हर प्रहार आत्मबोध की ओर एक कदम बन जाता है।

Read More
वृंदावन में संध्या समय बांसुरी बजाते कृष्ण और लज्जा से झुकी नजरों के साथ खड़ी राधा का दिव्य दृश्य

लज्जा

‘लज्जा’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, सौंदर्य और भावनात्मक गहराई को बेहद सुंदरता से प्रस्तुत करती है। इसमें लज्जा, भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम है, जो पाठक को वृंदावन की मनमोहक और आध्यात्मिक दुनिया में ले जाता है।

Read More
हनुमान जयंती पर भगवान हनुमान की भव्य पूजा और भक्तों का उत्सव

महाबली हनुमान जयंती

महाबली हनुमान के जन्म दिवस पर भक्तों में उत्साह और भक्ति की लहर है. यह कविता उनकी शक्ति, विनम्रता और श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम को समर्पित है.

Read More