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लज्जा

वृंदावन में संध्या समय बांसुरी बजाते कृष्ण और लज्जा से झुकी नजरों के साथ खड़ी राधा का दिव्य दृश्य

रश्मि मृदुलिका, देहरादून (उत्तराखण्ड)

श्याम मनोहर की बांसुरी जब – जब बाजे
लज्जा से नत नयन राधे धीमे- धीमे आये

रोके न रूके चरण कितना रोकना चाहे
कृष्णा के प्रेम में बंधी राधे न रूक पाये

लज्जा से मनोहर मुख मन मोहे जाये
वृन्दावन की शाम अति सुंदर कहा न जाये

देख- देख छटा अनुपम राधिका के रूप की
लज्जा से चांद बादलों की चुनरी में छुप जाये

वृषभानुजा लाड़ली राधिका प्रेम बरसाये
अद्भुत अतुलनीय रुप कृष्णा मन बस जाये

चंद्रिका की चांदनी कानन में बरसी जाये
मन लुभावन दृश्य मन मंदिर हर्षित कर जाये

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