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कदंब तले: राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति रस से सजी भावपूर्ण कविता

कदंब तले

कदंब वृक्ष की छांव में खड़े श्याम, राधा का पिघलता मन, बांसुरी की मधुर तान और प्रेम रस की वर्षा—‘कदंब तले’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति की अनुपम अनुभूति कराती है।

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मोर मुकुट धारण किए भगवान श्रीकृष्ण, हाथ में बांसुरी, वृंदावन के कुंजों में राधा और गोपियों के साथ दिव्य रासलीला का मनमोहक दृश्य।

श्री कृष्ण

ज बिहारी श्रीकृष्ण की दिव्य महिमा, राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और वृंदावन की रासलीला का सुंदर काव्यात्मक चित्रण। माखनचोर नंदलाल की बाल लीलाओं से लेकर उनके मनमोहक स्वरूप तक, यह कविता भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद का मधुर संदेश देती है। श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और समर्पण से ओतप्रोत यह रचना भक्तों के हृदय को भाव-विभोर कर देती है।

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पूर्णिमा की रात वृंदावन के वातावरण में बांसुरी लिए कृष्ण और उनके सामने भावपूर्ण मुद्रा में खड़ी राधा, आध्यात्मिक प्रेम और एकात्म का प्रतीकात्मक दृश्य।

राधाकृष्ण: दो नहीं, एक भी नहीं

राधा और कृष्ण के इस काव्य-संवाद में प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि आत्मिक एकत्व और समर्पण की अनुभूति बनकर सामने आता है—जहाँ दो अस्तित्व मिलकर राधाकृष्ण हो जाते हैं

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यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे बाल कृष्ण का भावपूर्ण और दिव्य दृश्य।

यशोदा-दामोदर

यह भक्ति कविता यशोदा मैया द्वारा ओखल से बंधे दामोदर स्वरूप श्रीकृष्ण की लीला, वात्सल्य और हरि-भक्ति की महिमा को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। कविता में प्रेम, करुणा और समर्पण का दिव्य स्पर्श है।

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वृंदावन में संध्या समय बांसुरी बजाते कृष्ण और लज्जा से झुकी नजरों के साथ खड़ी राधा का दिव्य दृश्य

लज्जा

‘लज्जा’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, सौंदर्य और भावनात्मक गहराई को बेहद सुंदरता से प्रस्तुत करती है। इसमें लज्जा, भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम है, जो पाठक को वृंदावन की मनमोहक और आध्यात्मिक दुनिया में ले जाता है।

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प्रभु दर्शन की चाह में तड़पती आत्मा आकांक्षा कविता

आकांक्षा

“आकांक्षा” एक संवेदनशील भक्ति कविता है, जिसमें एक भक्त की प्रभु के साक्षात दर्शन पाने की गहरी तड़प और आत्मिक संवाद को बेहद मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया गया है.

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मीरा के नाम ख़त

मीरा के जीवन और भक्ति को याद करते हुए लेखिका अपने भीतर उठते असंख्य प्रश्नों से जूझती है। बिना देखे कृष्ण पर किया गया अटूट विश्वास, सांसारिक सुखों का त्याग और विषम परिस्थितियों में भी स्वयं को अक्षुण्ण रखना मीरा की भक्ति आज भी मन को विस्मित और प्रेरित करती है।

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हटिया जन्माष्टमी पूजा समिति द्वारा भव्य काव्य महोत्सव

हटिया जन्माष्टमी पूजा समिति की ओर से हटिया रेलवे कॉलोनी स्थित डीआरएम ऑफिस के सामने बने पूजा पंडाल में छह दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी क्रम में समिति द्वारा भव्य काव्य महोत्सव का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, सचिव चंदन यादव और वरीय अध्याय अध्यक्ष डॉ. रजनी शर्मा के संयोजन में आयोजित इस कवि सम्मेलन में सभी आमंत्रित अतिथियों को राधे नाम अंगवस्त्र, मोमेंटो एवं पुष्प पौधा प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रजनी शर्मा ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना से किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सुरिंदर कौर नीलम ने की। उन्होंने अपनी रचना “जब मुरली बजी नटखट श्याम की, राधे-राधे हवाओं में होने लगी” प्रस्तुत कर माहौल को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर सदानंद सिंह यादव ने देशभक्ति पर आधारित मुक्तक व सोहर गीत गाए, पुष्पा सहाय गिन्नी ने कृष्ण प्रेम और विरह की भावपूर्ण अभिव्यक्ति की, वहीं सचिन शर्मा ने हवाईन गिटार पर शिव भजन और गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया

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