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कदंब तले: राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति रस से सजी भावपूर्ण कविता

कदंब तले

कदंब वृक्ष की छांव में खड़े श्याम, राधा का पिघलता मन, बांसुरी की मधुर तान और प्रेम रस की वर्षा—‘कदंब तले’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति की अनुपम अनुभूति कराती है।

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मोर मुकुट धारण किए भगवान श्रीकृष्ण, हाथ में बांसुरी, वृंदावन के कुंजों में राधा और गोपियों के साथ दिव्य रासलीला का मनमोहक दृश्य।

श्री कृष्ण

ज बिहारी श्रीकृष्ण की दिव्य महिमा, राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और वृंदावन की रासलीला का सुंदर काव्यात्मक चित्रण। माखनचोर नंदलाल की बाल लीलाओं से लेकर उनके मनमोहक स्वरूप तक, यह कविता भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद का मधुर संदेश देती है। श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और समर्पण से ओतप्रोत यह रचना भक्तों के हृदय को भाव-विभोर कर देती है।

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वृंदावन में संध्या समय बांसुरी बजाते कृष्ण और लज्जा से झुकी नजरों के साथ खड़ी राधा का दिव्य दृश्य

लज्जा

‘लज्जा’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, सौंदर्य और भावनात्मक गहराई को बेहद सुंदरता से प्रस्तुत करती है। इसमें लज्जा, भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम है, जो पाठक को वृंदावन की मनमोहक और आध्यात्मिक दुनिया में ले जाता है।

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“बृज की रज, रबड़ी और राधा

गोवर्धन की परिक्रमा कोई साधारण यात्रा नहीं, यह आत्मा की तपस्या है। 27 से 30 सितंबर तक की इस दंडवती परिक्रमा में मैंने न केवल शरीर को बल्कि हृदय को भी बृजरज में लोटते पाया। हर कदम, हर प्रणाम में बृज का माधुर्य, भक्ति की ऊष्मा और सेवा का भाव समाया था। भक्तों का प्रेम, रास्ते के भंडारे, बुजुर्गों की प्रेरणा और मित्र का साथ — सबने मिलकर यह यात्रा एक दिव्य अनुभव बना दी। राधा कुंड में स्नान से लेकर कुसुम सरोवर की विद्युत छटा तक, हर पड़ाव ने मुझे भीतर तक छू लिया। यह यात्रा थी—तन की थकान को तज कर मन की शांति पाने की।

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