मां की खुशी

घर में अकेली बैठी एक बुजुर्ग महिला, खिड़की से आती रोशनी के बीच उदासी और अकेलेपन का भाव

मधु मिश्रा कोमना, नुआपड़ा, ओडिशा.

“हेलो रेणू! तुम्हें मम्मी के बारे में कुछ पता चला? ” चार साल से अमेरिका में बसे सुदेश ने क्रोधावेश में अपनी बहन को फ़ोन में ये जानकारी दी I

” हाँ भाई .. मम्मी ने दूसरी शादी करने का फ़ैसला लिया है I कल उन्होंने मुझसे सारी बातें बताई तो मैंने उन्हें तुम्हारी ओर से भी अपनी सहमति दे दी है I”

” अरे, लोग क्या कहेंगे तुमने ये भी नहीं सोचा! ज़रा बताना क्या सोचकर तुमने मम्मी को हाँ कह दिया? “

“भाई तुम बताना विदेश जाने के बाद इंडिया कितने बार आये हो? और रोज़ मम्मी से कितनी बार बात करते हो? मेरी भी अपनी गृहस्थी है, जिम्मेदारियां है, कभी बात होती है कभी नहीं I साल में एकाध बार मैं उनके पास चली जाती हूँ या वो मेरे पास महीने पंद्रह दिनों के लिए आ जाती हैं I तुम तो जानते हो, हम छोटे थे तब पापा हमें छोड़ कर चले गए I
कैसे उन्होंने पापा की जगह नौकरी की कितनी मुश्किलों से हमें पाला I हमें पढ़ाया, फ़िर हमारी शादी की I अपनी पूरी ज़िंदगी उन्होंने हमारे लिए ही सोचा I
आज जब वो अपनी ख़ुशी के बारे में सोच रही हैं, तो उनकी अवहेलना क्यों..?
अंकल जी से मम्मी पार्क में मिलीं, उनके बच्चे भी विदेश में हैं I भाई सच तो ये है कि कुछ बातें ज़ाहिर नहीं होती पर घाव बनती जाती है I
मैं नहीं चाहती कि हमारी प्रतीक्षा करते हुए मम्मी घर के बंद कमरे में हमें कंकाल की तरह मिलें! “


लेखिका के बारे में
मधु मिश्रा
समकालीन हिंदी साहित्य की एक सशक्त और संवेदनशील रचनाकार हैं, जिनकी लेखनी मानवीय भावनाओं, सामाजिक यथार्थ और स्त्री मन की गहराइयों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करती है। ओडिशा के नुआपाड़ा ज़िले से संबंध रखने वाली मधु जी ने एम.ए. समाजशास्त्र (स्वर्ण पदक) एवं एम.फिल. की उच्च शिक्षा प्राप्त की है, जिसका स्पष्ट प्रभाव उनके चिंतन और लेखन में परिलक्षित होता है। कहानी, लघुकथा, कविता, हाइकु और आलेख जैसी विविध विधाओं में उनकी सक्रिय उपस्थिति है। वर्ष 2001 से उनकी रचनाएँ देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रही हैं। उनका लघुकथा संग्रह “धूप के पाँव” तथा कहानी संग्रह “ड्रीम गर्ल” विशेष रूप से चर्चित रहे हैं, जिनका विमोचन विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में हुआ। मधु मिश्रा की रचनात्मक यात्रा अनेक साझा काव्य, कहानी और लघुकथा संकलनों से समृद्ध है। साहित्य संगम, नारी अस्मिता, हिन्दी भाषा डॉट कॉम सहित कई संस्थाओं द्वारा उन्हें विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया है।वर्तमान में वे लेखन के साथ-साथ कथा नैरेशन के माध्यम से भी साहित्य को जीवंत रूप में पाठकों और श्रोताओं तक पहुँचा रही हैं। उनकी लेखनी संवेदना, सरोकार और सृजनशीलता का सुंदर संगम है।

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2 thoughts on “मां की खुशी

  1. सुरेश जी मेरी रचना प्रकाशन के लिए आपको हृदय से आभार 🙏💐🙂

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