निःस्वार्थ प्रेम
‘निःस्वार्थ प्रेम’ एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो स्त्री के मौन, त्याग, धैर्य और प्रेम की गहराई को प्रकृति के सुंदर बिंबों के माध्यम से अभिव्यक्त करती है। यह कविता बताती है कि समय के साथ स्त्री शिकायतों से नहीं, बल्कि अनुभवों से परिपक्व होती है। वह जीवन की कड़वाहट को मुस्कान में बदलना जानती है, बंधनों को पीछे छोड़ देती है और प्रेम के उस रूप को संजोए रखती है, जिसमें अधिकार नहीं, केवल समर्पण होता है। कविता पाठक को प्रेम, आत्मबल और स्त्री के अंतर्मन की अनकही दुनिया से परिचित कराती है।
