भक्ति, प्रेम और वैराग्य की दिव्य गंगा है श्रीमद् भागवत कथा

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस का आयोजन आज अत्यंत पावन, श्रद्धामय और भक्तिरस से ओतप्रोत वातावरण में संपन्न हुआ। प्रातःकाल से ही कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर ओर हरि नाम का स्मरण, जयकारे और भक्ति भाव की मधुर अनुभूति दिखाई दे रही थी। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा श्रवण कर रहे थे और संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।

कथा प्रवक्ता पूज्य श्री सुनीलकृष्ण जी व्यास (बेरछा वाले) ने द्वितीय दिवस की कथा का रसपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। यह कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन को पवित्र करने वाली भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और त्याग की अमृतधारा है। भागवत कथा से मनुष्य के हृदय में भगवान के चरणों के प्रति अटूट प्रेम जागृत होता है और जीवन सार्थक हो जाता है।

पूज्य व्यास जी ने गोपी गीत का भावमय वर्णन करते हुए कहा कि गोपी गीत श्रीमद् भागवत कथा का हृदय है। इसमें गोपियों का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम, निश्छल और अनन्य प्रेम प्रकट होता है। गोपियों ने अपना तन, मन और प्राण श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया। उनका प्रेम किसी फल की कामना से रहित था, यही सच्ची भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और प्रेम से छलक उठीं।

कथा के दौरान राजा परीक्षित के जन्म का पावन प्रसंग सुनाते हुए पूज्य व्यास जी ने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं उत्तरा के गर्भ की रक्षा की। भगवान की कृपा से ही राजा परीक्षित का जन्म हुआ, जो आगे चलकर श्रीमद् भागवत कथा के परम श्रोता बने। यह प्रसंग भगवान की करुणा, भक्तवत्सलता और दिव्य लीला का सजीव उदाहरण है।

द्वितीय दिवस की आरती एवं प्रसादी के यजमान श्री रामलाल जी पांचाल (झुटावद वाले), श्री दिलीप जी पांचाल, श्री धर्मेंद्र जी पांचाल, श्री मुकेश जी पांचाल एवं समस्त पांचाल परिवार रहे। यजमानों ने पूर्ण श्रद्धा, प्रेम और सेवा भाव से आरती एवं प्रसादी का आयोजन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

कथा के मध्य भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने झूमते हुए हरि नाम का संकीर्तन किया। मंजीरों और करतालों की मधुर ध्वनि के साथ पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया। द्वितीय दिवस की कथा ने श्रोताओं के हृदय में भगवान के प्रति प्रेम, भक्ति और वैराग्य की अलौकिक अनुभूति भर दी और सभी को आत्मिक आनंद से परिपूर्ण कर दिया।

One thought on “भक्ति, प्रेम और वैराग्य की दिव्य गंगा है श्रीमद् भागवत कथा

  1. अतिआनंदमयी भागवत कथा का आयोजन किया गया।इसके लिए श्री राम हनुमान मंदिर की समिति को बहुत बहुत साधुवाद।🙏💐

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