उज्जैन में पहली बार सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

उज्जैन में पहली बार सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट, आरडी गार्डी ने रचा इतिहास

12 वर्षीय कैंसर पीड़ित बालक को मिला नया जीवन

उज्जैन . धर्म और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध उज्जैन अब चिकित्सा क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है . जिले के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में पहली बार सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जाने से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई दिशा मिली है .

इस उपलब्धि के साथ अब मालवा अंचल के मरीजों को जटिल उपचार के लिए इंदौर, मुंबई या दिल्ली जैसे महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा . स्थानीय स्तर पर ही उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने से समय, खर्च और मानसिक दबाव—तीनों में राहत मिलेगी .

यह सफलता मेडिकल ऑन्कोलॉजी और हेमेटो-ऑन्कोलॉजी विभाग की टीम ने डॉ. चितलकर और डॉ. प्रियेश दुबे के नेतृत्व में हासिल की . तराना तहसील के ग्राम झुमकी के 12 वर्षीय बालक का सफल प्रत्यारोपण कर उसे नया जीवन दिया गया . बालक वर्ष 2022 से एनाप्लास्टिक लार्ज सेल लिम्फोमा जैसे गंभीर कैंसर से पीड़ित था .

डॉक्टरों ने पहले चरण में बालक के शरीर से स्टेम सेल निकालकर सुरक्षित किए और फिर हाई-डोज़ कीमोथैरेपी के बाद उन्हें पुनः शरीर में प्रत्यारोपित किया . यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल और संवेदनशील मानी जाती है, जिसे विशेषज्ञता और सटीक योजना के साथ पूरा किया गया .ट्रांसप्लांट के बाद बालक को 20 दिनों तक विशेष कीटाणुरहित कक्ष में रखा गया, जहां संक्रमण से बचाव के लिए लगातार निगरानी की गई . डॉक्टरों की सतर्कता और समर्पण के चलते बालक पूरी तरह स्वस्थ हो गया और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई . इस सफलता ने न केवल आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज की क्षमताओं को साबित किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक नई उम्मीद भी जगाई है . अब मालवा के कैंसर मरीजों को अपने ही क्षेत्र में आधुनिक और प्रभावी उपचार मिल सकेगा .

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