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ज्ञान का प्रकाश फैलाते दिव्य गुरु के चरणों में नतमस्तक शिष्य

जय गुरुवर

जय गुरुवर” गुरु की महिमा, ज्ञान, कर्म और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित एक ओजपूर्ण एवं भक्तिमय कविता है। इसमें गुरु को ज्ञान का पुंज, जीवन रूपी नौका के पथप्रदर्शक और अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाले परम प्रकाश के रूप में चित्रित किया गया है। कविता यह संदेश देती है कि गुरु ही जीवन को सही दिशा, श्रेष्ठ कर्म और मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं। श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत यह रचना भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का सुंदर एवं प्रेरक स्वरूप प्रस्तुत करती है।

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खुली किताब से निकलती रोशनी और भावनाओं का संसार, साहित्य की शक्ति को दर्शाता दृश्य

किताबों की खुशबू

किताबों की खुशबू में एक ऐसा संसार बसता है, जहाँ शब्द नहीं, भावनाएँ बोलती हैं। साहित्य केवल अक्षरों का मेल नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज़ है, जो हर युग में मन को छूती है। यह कभी भक्ति, कभी सत्य, तो कभी प्रेम और जीवन की गहराई बनकर हमारे भीतर उतरता है। अंधेरों में यही एक दीप बनकर राह दिखाता है और उलझनों में उत्तर बनकर सामने आता है। इसलिए किताबों से जुड़ना, दरअसल खुद से जुड़ना है क्योंकि साहित्य ही हमें इंसान बनने का सच्चा अर्थ सिखाता है।

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भक्ति, प्रेम और वैराग्य की दिव्य गंगा है श्रीमद् भागवत कथा

श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर भक्ति, प्रेम और वैराग्य का अनुपम संगम देखने को मिला। पूज्य श्री सुनीलकृष्ण जी व्यास ने गोपी गीत और राजा परीक्षित जन्म प्रसंग के माध्यम से निष्काम भक्ति और भगवान की करुणा का भावपूर्ण संदेश दिया। संपूर्ण वातावरण हरि नाम और भक्तिरस से सराबोर रहा।

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ज्ञान का कलित वर्णन

यह कविता ज्ञान को रूप, रस, शब्द, अनुभव और विवेक के समग्र स्वरूप में प्रस्तुत करती है। बालक के ‘क, ख, ग’ से लेकर विद्वान की विरासत तक ज्ञान को जीवन, संघर्ष, विनम्रता और सहानुभूति की निरंतर यात्रा के रूप में रेखांकित करती है।

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बाबूजी की हाथ घड़ी

मेरे पिताजी एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे, जिनकी तनख्वाह कम थी, लेकिन आत्मसम्मान और ज्ञान कूट-कूट कर भरा था। साल 1974 में उनके तबादले के समय, घर का सारा खर्च उधारी पर चलता था। घर का सामान बैलगाड़ी में शिफ्ट करना था, लेकिन पिताजी ने सबसे पहले 60 रुपए का उधार चुकाया। इसके लिए उन्होंने अपनी प्रिय सुनहरे डायल वाली हैनरी सैंडो घड़ी बेच दी।

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रंगों से सजा जीवन

लाल बिंदी की ममता हो या आसमां का नीला सुकून — हर रंग जीवन को एक नई दिशा देता है। हर रंग अपनी कहानी कहता है, और इन्हीं रंगों से जीवन सच में पूर्ण बनता है।”

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मातरानी के अनन्य स्वरूप

मातारानी की महिमा असीमित और अनन्य है। सृष्टि की हर क्रियाशीलता में उनका वंदन और पूजन होता है। दया, शांति, चेतना और सामर्थ्य के प्रतिरूप के रूप में, माँ ज्ञान से पूर्ण प्रकाशपुंज हैं। वह जीवन की सर्वशक्तिप्रदायिनी हैं, जो समस्त जगत की असुरी शक्तियों का संहार करती हैं और यश, रूप, आरोग्य व सौभाग्य प्रदान करती हैं।

माँ अमिय-स्रोत जैसी निरंतर नाद करती हैं और दुष्टों का दमन करने के लिए विकराल रूप धारण कर लेती हैं। प्रचंड दामिनी और रमा कामिनी के स्वरूप में वह भक्तों के हर संताप को हरती हैं और उनके मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।

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हिन्दी से है मेरी पहचान

यह कविता हिंदी भाषा के प्रति प्रेम और गर्व को उजागर करती है। हिंदी केवल हमारी मातृभाषा ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, ज्ञान और संस्कारों का प्रतीक भी है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि हिंदी हमारे जीवन, साहित्य और राष्ट्र की आत्मा का अभिन्न हिस्सा है।

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स्त्री है त्रिशक्ति

स्त्री वास्तव में त्रिशक्ति का प्रतीक है—वह शारदा की ज्ञानमयी छवि है, शिवा की त्याग और साहस भरी ऊर्जा है और श्री की समृद्धि और करुणा से भरपूर है। उसका स्वरूप कभी पीपल की ठंडी छाँव-सा शीतल है तो कभी सावन की झड़ी-सा तरल और जीवनदायी। ठिठुरती सर्दियों में वह गुनगुनी धूप बन जाती है। सृष्टि की शुरुआत भी उसी से होती है और अंत भी उसी में समाया हुआ है।

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नेशनल बुक रीड डे : किताबों के साथ एक दिन

आज का नेशनल बुक रीड डे केवल एक तारीख नहीं, बल्कि किताबों के साथ समय बिताने, उन्हें पढ़ने और उनकी संगति का आनंद लेने का अवसर है। पढ़ना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है—यह तनाव कम करता है, याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाता है, और कल्पनाओं को उड़ान देता है। किताबें हमें इतिहास से जोड़ती हैं, सोच बदलती हैं, और जीवन को नई दिशा देती हैं। चाहे बच्चों को पढ़कर सुनाएँ, दोस्त या परिवार के साथ साझा करें, या अकेले अपने कोने में बैठकर पढ़ें—किताबों का असली आनंद अनुभव और आत्मा से जुड़ने में है।

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