मातरानी के अनन्य स्वरूप

सुमन दीक्षित, प्रसिद्ध लेखिका, कोलकाता

सृष्टि की क्रियाशीलता के हर स्वरूप में,
वंदन व पूजन होता माँ तेरा अनवरत!

दया, शान्ति, चेतना व सामर्थ्य प्रतिरूप,
ज्ञान से परिपूर्ण है तू प्रकाशपुंज ज्योत!

ओजस्वी है कांति तेरी, जीवन की सर्व-शक्तिप्रदायिनी।
समस्त जगत की असुरी शक्तियों का करती तू संहार,
यश, रूप, आरोग्य व सौभाग्य प्रदायिनी,
नवदुर्गा के हर रूप में माँ तेरी जय-जयकार!

अमिय-स्रोत सी तू सदा कल-कल नाद करती,
दुष्टों का दमन करने को विकराल रूप धर लेती!
प्रचण्ड दामिनी, रमा कामिनी, स्वरूप विस्तार करती,
रति, सती, तू अभया बन वीणा सी झंकार करती!

अपने अनन्य भक्तों के सकल संताप तू हर लेती,
भक्तिभाव से पूजता जो मनोवाँछित फल उन्हें देती!

हे कल्याणी! शोक निवारिणी, विनय सबकी सुनती,
भयहारिणी, भवतारिणी, उमा तू, हे महामाया..!
तू ही सीता, तू ही निवासिनी, ब्रज की रानी राधा,
त्रिभुवन सुखदाता माँ, हर लेती तू समस्त भव बाधा!

स्नेहमयी, सुधा बरसाती, हे कमला, तू वर दे,
नित्य अभेदमयी, वाणी विमला, हम सब संतति हैं तेरे!

One thought on “मातरानी के अनन्य स्वरूप

  1. माता रानी के रचना प्रकाशित करने के लिए आभार आपका सुरेश सर 🙏

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *