Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
होटल के बाहर भूखी वृद्धा को रोटी देता हुआ एक बच्चा – इंसानियत पर आधारित भावुक हिंदी लघुकथा

सुकून

होटल में बैठा एक परिवार तरह-तरह की रोटियों का ऑर्डर दे रहा था। तभी पिता बाहर मिली एक भूखी वृद्धा का ज़िक्र करते हैं, जो केवल एक सूखी रोटी की आस लगाए बैठी थी। यह सुनकर बेटा चुपचाप अपनी प्लेट से रोटियाँ लेकर बाहर चला जाता है। लौटते समय उसके शब्द सभी के दिल को छू लेते हैं रोटी का असली स्वाद उसकी किस्म में नहीं, बल्कि किसी भूखे का पेट भरने के बाद मिलने वाले सुकून में होता है।

Read More

फुगी, नवी और मैं

वी घाव चाटकर बिल्ली को ठीक करती है, कबूतर के मरने पर रोती है, और हर जीव को अपनाने की अद्भुत ताकत रखती है। कभी-कभी लगता है वह बोल नहीं सकती, पर सुनना, समझना और प्रेम बाँटना उसे हम इंसानों से कहीं बेहतर आता है।

Read More

मातरानी के अनन्य स्वरूप

मातारानी की महिमा असीमित और अनन्य है। सृष्टि की हर क्रियाशीलता में उनका वंदन और पूजन होता है। दया, शांति, चेतना और सामर्थ्य के प्रतिरूप के रूप में, माँ ज्ञान से पूर्ण प्रकाशपुंज हैं। वह जीवन की सर्वशक्तिप्रदायिनी हैं, जो समस्त जगत की असुरी शक्तियों का संहार करती हैं और यश, रूप, आरोग्य व सौभाग्य प्रदान करती हैं।

माँ अमिय-स्रोत जैसी निरंतर नाद करती हैं और दुष्टों का दमन करने के लिए विकराल रूप धारण कर लेती हैं। प्रचंड दामिनी और रमा कामिनी के स्वरूप में वह भक्तों के हर संताप को हरती हैं और उनके मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।

Read More

स्त्री है त्रिशक्ति

स्त्री वास्तव में त्रिशक्ति का प्रतीक है—वह शारदा की ज्ञानमयी छवि है, शिवा की त्याग और साहस भरी ऊर्जा है और श्री की समृद्धि और करुणा से भरपूर है। उसका स्वरूप कभी पीपल की ठंडी छाँव-सा शीतल है तो कभी सावन की झड़ी-सा तरल और जीवनदायी। ठिठुरती सर्दियों में वह गुनगुनी धूप बन जाती है। सृष्टि की शुरुआत भी उसी से होती है और अंत भी उसी में समाया हुआ है।

Read More