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घर में अकेली बैठी एक बुजुर्ग महिला, खिड़की से आती रोशनी के बीच उदासी और अकेलेपन का भाव

मां की खुशी

‘मां की खुशी’ एक मार्मिक लघु कहानी है, जो माता-पिता के त्याग, उनके अकेलेपन और समाज के डर के बीच उनकी खुशियों के अधिकार को उजागर करती है। यह कहानी रिश्तों की सच्चाई और बदलती सोच को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है।

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भ्रम : एक म्यान दो तलवारें

राम “और ” श्याम ” नाम रखूंगी भाभीजी – मेरे भी आंगन में किलकारी गूंजेगी , मेरी गोद से नहीं तो क्या हुआ ! छोटी की गोद से सही ।
बस, पांडे जी को खुश देखना चाहती हूं ।
अपने ही पति की सेज सजाई पंडिताइन ने – घर में किलकारी भी गूंजी …….
लेकिन अपने हाथों अपनी बगिया …

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