
पुष्पा पाठक, छतरपुर (मध्य प्रदेश)
जग को रोशन करने वाले
खुद सूरज बन जाना तुम,
टूटे मन के सूने घर में,
आशा दीप जलाना तुम।।
जग को रोशन करने वाले,
थके कदम सहलाना तुम,
भटके हुए मुसाफ़िर को,
सही राह दिखलाना तुम।।
जग को रोशन करने वाले,
नफरत को पिघलाना तुम,
सूखी पड़ी करुण धरती पर,
प्रेम मेघ बरसाना तुम।
जग को रोशन करने वाले,
सत्य ध्वज उठाना तुम,
झूठ अंधेरी गलियों में भी,
साहस से मुस्काना तुम।
जग को रोशन करने वाले,
स्वार्थ धुआँ हटाना तुम,
मानवता के दीपक को,
हर दिल में सजाना तुम।।

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