
नीलम पेड़ीवाल, जमशेदपुर (झारखंड)
पूज्य पिता श्री
लाते हैं परिवार में,
शुभता बारम्बार।
सर्वहितैषी हो पिता,
आप ही पालनहार॥
आप! अपने कंधों पर परिवार का
सारा बोझ उठाते हो,
हमें हर्ष देकर स्वयं
दुःखों को अपनाते हो।
दुनिया को दिखाते हो स्वयं को कठोर,
पर एकांत में अश्रु भी बहाते हो।
अनुपम साहस वाले पिता श्री!
ऐसा केवल आप ही कर सकते हो।
जो प्रेम और विश्वास की मूरत होते हो,
जो दया और स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति होते हो,
नित रहता है आपमें असीम स्नेह और प्रेम,
हमारे मन-मंदिर के तो देवता आप ही होते हो।
ऐसा केवल और केवल आप ही कर सकते हो।
आप! घर-परिवार की नींव होते हो,
ज़िम्मेदारियों का भार सदा सहते हो।
अपनी मेहनत की कमाई से एक दिन
झोंपड़ी को भी महल बना देते हो।
जो अपना सर्वस्व समर्पित करते हो,
जीवन भर संघर्ष कर सबकी इच्छाएँ पूरी करते हो।
अपने सुख त्यागकर न जाने
कितने कष्ट सहते हो।
जो निरंतर हौसलों से उड़ान भरते हो,
न थकते हो, न रुकते हो,
नित आगे बढ़ते रहते हो।
विश्वास और नेह का दीपक
सदा जलाए रखते हो।
ऐसा केवल और केवल आप ही कर सकते हो।
ईश्वर का सबसे सुंदर वरदान यदि धरती पर कोई है,
तो वह पिता के रूप में हमारे जीवन में विद्यमान है।
पिता केवल एक रिश्ता नहीं,
जीवन का वह वटवृक्ष हैं,
जिसकी छाया में पूरा परिवार
सुरक्षित और सुखी रहता है॥
