उम्मीदों का उज़ास
लाड़-प्यार में बीता बचपन, संघर्षों से भरी ज़िंदगी, बेटों की भूल, बेटी का त्याग और अंततः मेहनत से मिली सफलता—यह कहानी बताती है कि जब परिवार साथ खड़ा हो, तो हर अंधेरे के बाद उम्मीदों का उजास ज़रूर लौटता है।

लाड़-प्यार में बीता बचपन, संघर्षों से भरी ज़िंदगी, बेटों की भूल, बेटी का त्याग और अंततः मेहनत से मिली सफलता—यह कहानी बताती है कि जब परिवार साथ खड़ा हो, तो हर अंधेरे के बाद उम्मीदों का उजास ज़रूर लौटता है।
हम अक्सर पिता को केवल एक मजबूत व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं, लेकिन उनके भीतर भी भावनाएँ, डर और थकान होती है। यह लेख एक बेटे के उस एहसास की कहानी है, जब उसने पहली बार अपने पिता को रोते हुए देखा।
वर्तमान पिता” एक मार्मिक कविता है, जो उस पिता की कहानी कहती है जिसने अपना पूरा जीवन परिवार के लिए समर्पित कर दिया, लेकिन बुढ़ापे में उपेक्षा, अकेलेपन और स्वार्थपूर्ण रिश्तों का सामना कर रहा है। यह कविता बदलते पारिवारिक मूल्यों और माता-पिता के प्रति संवेदनशील होने का संदेश देती है।
पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि परिवार की नींव, विश्वास का स्तंभ और त्याग का दूसरा नाम हैं। प्रस्तुत है पिता के प्रेम, संघर्ष और समर्पण को समर्पित एक हृदयस्पर्शी कविता।
पिताजी चौबीसों घंटे की चौकीदारी करते रहे। दिन-रात की दोहरी ड्यूटी, बस कुछ घंटों की अधूरी नींद और एक छोटे से केबिन में सिमटी ज़िंदगी—यही उनका संसार था। मैंने जब जाना कि बाबूजी महीनों तक मुश्किल से दो-तीन घंटे ही सो पाते हैं, तो मेरा दिल काँप उठा। इतना बड़ा त्याग उन्होंने सिर्फ़ इसीलिए किया कि मैं पढ़-लिख सकूँ और परिवार संभल सके। उनके संघर्ष को याद कर आज भी लगता है—किसी इंसान की मजबूती और प्यार का सबसे सच्चा रूप शायद पिता ही होते हैं।