उम्मीदों की ग़ज़ल

खूबसूरत हिंदी ग़ज़ल: हौसलों को न गिराया कर

कंचनमाला “अमर”(उर्मी

भाव अपने न तू बढ़ाया कर,
ज़िन्दगी घर तू मेरे आया कर ।

नर्मियां जी़स्त की ज़रूरत है,
बाअदब उससे पेश आया कर।

ज़िन्दगानी बहुत रुलाती है,
फिर भी उसको गले लगाया कर।

ख़्वाब बिखरे तो क्या हुआ आखिर,
हौसलों को न यूं गिराया कर।

लोग बातों की बात करते हैं,
कुछ भी दिल का न यूं बताया कर।

रोशनी को पकड़ न हाथों में ,
दीप से दीप को जलाया कर।

साथ देती है रूह अपनी ही,
फासले ख़ुद से ना बढ़ाया कर।

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