
अंशु गुप्ता, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
गुरु कृष्ण का शिष्य,
महाभारत का महावीर हूँ।
सुभद्रा माँ का लाडला,
पिता अर्जुन का पुत्र हूँ।
उत्तरा का अर्धांग,
वीर घटोत्कच का भाई हूँ।
ऐसा विजयी हूँ,
जो वीरगति को प्राप्त हुआ हूँ।
धरती माँ का अंश हूँ,
नाम महावीर अभिमन्यु हूँ।
मामा कृष्ण का भांजा,
और छल से मारा गया शख्स हूँ।
न लिया ज्यादा अनुभव,
न जीवन मेरा लंबा था।
महाभारत के युद्ध में,
कौरवों में हर वीर अज्ञानी था।
ऐसा चक्रव्यूह रचाया था,
एक पिता और गुरु के सामने,
उनके पुत्र और शिष्य को मारा था।
भूल गए थे धर्म,
और बुरा कर्म किया था।
खून से सना था मैं,
और माँ की गोद में लेटा था।
अपनों ने ही अपनों को
तीरों से साधा था।
पितामह भीष्म, गंगा माँ का
अपने साथ नाता भूल गए थे।
नियति कठोर थी,
जो मेरे पिता मुझसे दूर थे।
गर्भ में था जब मैं,
मेरे पिता दे रहे मुझे चक्रव्यूह का ज्ञान थे।
परिस्थिति का मोड़ कैसा,
मेरी माँ नींद से सो गईं।
न ले सका मैं ज्ञान पूरा,
रह गया ज्ञान अधूरा।
आखिर तक सांस रहा,
और हर आस तक लड़ा था मैं।
बड़ा कलंक छाया था,
क्योंकि युवक नहीं, उन्होंने बालक को मारा था।
शरीर नहीं, हर मन दुख था,
जैसे सब मेरे रक्त का भूखा था।
ऐसी पीड़ा न हुई होगी,
कि आसमान के भी अश्रु गिरा था।
प्रणाम उन महारथियों को,
जो मेरे विजय का मान रखे।
यह एक ऐसा विजय था,
जो बहुत वीर, वीरगति को प्राप्त था।
मैं सुभद्रा माँ का लाडला,
पिता अर्जुन का पुत्र था…

Mahabharat pr adbhut kriti🙏🏼🫶🏻
अप्रतिम रचना के लिए शुभकामनाएं 💖♥️
Apki kavita sandhar hai sachhiii ❤️☺️