द्रौपदी–कृष्ण संवाद: “विश्वास का वस्त्र

द्रौपदी–कृष्ण संवाद

द्रौपदी और श्रीकृष्ण के बीच यह संवाद “विश्वास का वस्त्र” महाभारत की उस पीड़ा को उजागर करता है, जहाँ नारी अस्मिता पर प्रश्न उठे। यह रचना विश्वास, धर्म, और नारी सम्मान के गहरे अर्थ को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।

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रणक्षेत्र में गूंजे सत्य के शाश्वत शब्द

गीता शब्द को सुनते ही मन में जिज्ञासा आना स्वाभाविक है की इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी। भगवान कृष्ण को अपने अलौकिक रूप में आकर रणक्षेत्र के बीच उपदेश देने की आवश्यकता क्यों पड़ी।कहते है उस समय रणक्षेत्र का दृश्य था की एक तरफ कौरवों की सेना दूसरी तरफ पांडवो की सेना थी और अपने ही परिवार जानो को दिख अर्जुन विचलित हो जाते है।

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