द्रौपदी की करुण पुकार

महाभारत की सभा में द्रौपदी की करुण पुकार, भगवान कृष्ण द्वारा चीर रक्षा का दिव्य दृश्य

नूतन राय, मुंबई

कृष्णा गोविन्द गिरधर मुरारी
लाज रखलो सभा में हमारी
कृष्ण गोविंद गिरधर मुरारी

चल रहा छल कपट का तमाशा
कपटी शकुनि ने फेका है पासा
पांचो पांडव बने हैं जुआरी
लाज रख लो सभा में हमारी
कृष्ण गोविंद गिरिधर मुरारी।।

पांच पतियों की हूं मैं सुहागन
कोई मुझसे नहीं हो अभागन
मैं जुए में गई आज हारी
लाज रख लो सभा में हमारी
कृष्ण गोविंद गिरिधर मुरारी ।।

राजा धृतराष्ट्र ने मौन साधा
पितामह को प्रतिज्ञा ने बांधा
ये यह विवशता ये कैसी लाचारी
लाज रखलो सभा में हमारी
कृष्ण गोविंद गिरिधर मुरारी।।

दुष्ट पापी दुर्योधन दुशासन
मौन है न्याय का सिंहासन
सबके आगे मैं रो -रो के हारी
लाज रखलो सभा में हमारी
कृष्ण गोविंद गिरिधर मुरारी ।।

बस विदूर ही विदूर बोलते हैं
बनके पाषाण सब देखते हैं
अंधे बहरो की सभा है ये सारी
लाज रखलो सभा में हमारी
कृष्ण गोविंद गिरिधर मुरारी।।

तुम सखा मैं सखी हूँ तुम्हारी
आश बस एक बची है तुम्हारी
आज लाचार बहना तुम्हारी
लाज रखलो सभा में हमारी।।
कृष्ण गोविंद गिरिधर मुरारी

एक पल की जो की तुमने देरी
लाज लुट जाएगी आज मेरी
अब तो आजाओ गिरधर मुरारी
लाज रखलो सभा में हमारी
कृष्ण गोविंद गिरिधर मुरारी।।

लोग कहते है तुम अंतर्यामी
सारी सृष्टि के हो तुम तो स्वामी
मेरी रक्षा करो हे मुरारी
लाज रखलो सभा में हमारी ।।

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