तेरे जाने के बाद

तेरे जाने के बाद कविता

तेरे जाने के बाद,
आँसू भी हर रोज़ नहीं आते।
कुछ दिन तो ऐसे भी गुज़रे,
जब रोने का वक़्त नहीं मिलता।

सुबह वैसे ही होती है
अलार्म बजता है, काम पुकारते हैं,
रसोई में चूल्हा जलता है,
और ज़िम्मेदारियाँ हाथ थाम लेती हैं।

घर खाली नहीं हुआ पूरी तरह,
बस एक कोना चुप हो गया है,
जहाँ तेरी हँसी रहा करती थी,
अब वो सिर्फ यादों में रहती है।

लोग कहते हैं समय भर देता है सब,
पर सच ये है,
समय सिर्फ जीना सिखाता है,
भूलना नहीं।

अब मैं मुस्कुरा लेती हूँ,
बातें भी करती हूँ सबसे,
पर अंदर कहीं एक खालीपन
चुपचाप अपना सच कहता है।

तेरे जाने के बाद,
ज़िंदगी रुकी नहीं
पर पहले जैसी भी नहीं रही,
बस चल रही है…

थोड़ी समझदार,
थोड़ी थकी हुई,
और बहुत कुछ सिखाती हुई।

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