एक भावनात्मक दृश्य जिसमें एक व्यक्ति पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा है, पतझड़ के पत्ते गिर रहे हैं और आसपास बदलते मौसम के साथ प्रकृति में आशा और स्मृतियों का प्रतीकात्मक चित्रण है

मौसम लौटता है ज़रूर

“मौसम लौटता है ज़रूर” एक संवेदनशील कविता है जिसमें ऋतुओं के माध्यम से प्रेम, बिछड़न और उम्मीद को बेहद खूबसूरती से व्यक्त किया गया है। यह कविता जीवन के चक्र और भावनाओं की गहराई को छूती है।

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जब से तुमसे नयन मिले

महक

जब से हमारी नज़रें मिली हैं, दिल की दुनिया बदल सी गई है. इच्छाओं को जैसे नए पंख मिल गए हैं और हर ख्वाहिश अब तुम्हारी ओर ही उड़ती है. दिल की बातें दिल तक पहुंचने को तरस रही हैं, लेकिन सावन की बरसात हमारे मिलने में दूरी बनकर खड़ी है. हर बूंद में एक अजीब सी आग है, जो तुम्हारी याद और लगन को और गहरा कर देती है. मन में बस एक ही चाह है तुमसे मिलना, तुम्हारे करीब आना, और इस प्रेम को हर पल जीना.

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समुद्र किनारे अकेला पथिक दूर क्षितिज की ओर देखता हुआ

एक पथिक

“एक पथिक” एक गहन भावनात्मक हिंदी कविता है, जिसमें सागर और पथिक के प्रतीकों के माध्यम से मन की व्यथा, प्रेम, प्रतीक्षा और आत्मसंवाद को अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है। यह कविता केवल बाहरी दृश्य का चित्रण नहीं करती, बल्कि भीतर चल रहे भावनात्मक द्वंद्व और एकाकीपन की गहराई को उजागर करती है।

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होली के रंग और यादों की कहानी

रंगों को मलाल है..

होली के रंग खुशियों के प्रतीक माने जाते हैं, लेकिन कभी-कभी ये रंग विरह की पीड़ा भी बयान कर देते हैं। यह कविता प्रेम, दूरी और यादों के भाव को रंगों के प्रतीक के माध्यम से व्यक्त करती है जहां रंग भी जैसे पूछते हैं, साथ क्यों नहीं।

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बस स्टॉप पर खड़ी एक युवती, आँखों में इंतज़ार और होठों पर हल्की मुस्कान, प्रेम और विरह की भावुक हिंदी कविता का दृश्य।

कुछ पलों की कहानी

यह रचना प्रेम, स्मृति और इंतज़ार की मार्मिक कथा है। प्यार में पागल एक लड़की, जो समय के साथ आगे बढ़ गई है, लेकिन वादों की स्मृतियाँ आज भी बस स्टॉप पर खड़ी मिलती हैं। शीशा, काजल, मुस्कान और हर आती बस सब मिलकर अधूरे प्रेम और लौटकर न आने वाले वादे की एक संवेदनशील कविता रचते हैं।

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