आँसुओं की नदी
प्रेम की प्यास, विरह की पीड़ा और टूटते संयम के बीच मन की गहरी बेचैनी को स्वर देती यह कविता आँसुओं से भरी ज़िंदगी और अधूरे प्रेम की भावनात्मक कहानी कहती है.

प्रेम की प्यास, विरह की पीड़ा और टूटते संयम के बीच मन की गहरी बेचैनी को स्वर देती यह कविता आँसुओं से भरी ज़िंदगी और अधूरे प्रेम की भावनात्मक कहानी कहती है.
प्यासी पलकें प्रेम और विरह की उस बेचैनी को बयां करती हैं, जहाँ यादें हर पल साथ रहती हैं, मगर प्रेम की प्यास फिर भी अधूरी रह जाती है।
सावन की हर बूंद बीते प्रेम की यादों को फिर से जगा देती है। ‘मन का सावन’ विरह, प्रतीक्षा और मिलन की अधूरी चाहत को बारिश के रूपक में पिरोती भावपूर्ण कविता है।
“कौन हो तुम?” एक ऐसी भावपूर्ण कविता है, जिसमें प्रेम, विरह, प्रतीक्षा और आत्मिक जुड़ाव की अनुभूतियाँ शब्दों के माध्यम से जीवंत हो उठती हैं।
कुछ रिश्ते भले ही जीवन से चले जाएँ, लेकिन उनकी यादें हमेशा साथ रहती हैं। यह कविता बिछड़ने के बाद भी दिल में बसे प्रेम, अधूरी मुलाकातों, बारिश की स्मृतियों और अनकहे एहसासों को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।
सावन केवल बारिश का मौसम नहीं, बल्कि स्मृतियों, प्रतीक्षा और अनकहे दर्द का भी नाम है। ‘प्रतीक्षारत सावन’ कविता उस मनःस्थिति को अभिव्यक्त करती है, जहाँ बाहर प्रकृति हरियाली से भर उठती है, लेकिन भीतर का आँगन अब भी किसी अपने की प्रतीक्षा में सूना रहता है।
प्रेम और विरह की गहन अनुभूति से सजी यह कविता चातक, स्वाति और मधुसूदन जैसे प्रतीकों के माध्यम से प्रतीक्षा, तड़प और आशा का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करती है। हर पंक्ति पाठक को भावनाओं की गहराई तक ले जाती है।
कुछ यादें समंदर की लहरों जैसी होती हैं। वे बार-बार दिल के किनारे से टकराती हैं और किसी अपने का नाम फिर से लिख जाती हैं। यह कविता प्रेम, विरह और उन यादों की कहानी है, जो समय बीत जाने के बाद भी दिल में जीवित रहती हैं।
स्मृति और… तुम!’ प्रेम और अनुपस्थिति के सूक्ष्म भावों को गहरी संवेदना के साथ अभिव्यक्त करती कविता है। स्मृतियों की नमी, इंतज़ार की सीलन और भीगे सन्नाटे के बीच यह रचना बताती है कि प्रेम को अंत तक ढोने के लिए शब्द नहीं, स्मृति चाहिए।