उफनते सागर के किनारे खड़ा एक चिंतनशील व्यक्ति अपनी परछाई को निहारता हुआ, समय, अस्तित्व और जीवन के बदलते किरदारों पर मनन करता हुआ।

किरदार

हम सभी अपने भीतर कई किरदारों को जीते हैं। कुछ समय के साथ खो जाते हैं, कुछ स्मृतियों में रह जाते हैं, और कुछ जीवन के संघर्षों के बीच नई पहचान गढ़ते हैं। ‘किरदार’ जीवन, समय, जिजीविषा और आत्म-अस्तित्व की उसी अंतर्द्वंद्वपूर्ण यात्रा का काव्यात्मक दस्तावेज़ है।

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सीरत और सूरत के अंतर को दर्शाती हिंदी कविता, जिसमें चरित्र, संस्कार और आंतरिक सुंदरता की महत्ता का वर्णन किया गया है।

सीरत और सूरत

बाहरी सुंदरता समय के साथ फीकी पड़ सकती है, लेकिन अच्छे संस्कार, चरित्र और सौम्यता जीवनभर व्यक्ति की पहचान बने रहते हैं। सीरत और सूरत के अंतर को दर्शाती यह कविता पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।

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डेस्क पर बैठकर लेखन करती हुई भारतीय शिक्षिका और कवयित्री, सामने डायरी और पुस्तकें, साहित्यिक वातावरण में प्रेरणादायक व्यक्तित्व का चित्र।

दहलीज से साहित्य शिखर तक

माता-पिता के संस्कार, परिवार के सहयोग और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाने वाली शिक्षिका एवं कवयित्री की प्रेरक जीवन यात्रा। जानिए उनके लेखन, छंद साधना, संस्मरण प्रेम और सफलता के पीछे की कहानी।

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जीवन के कठिन मार्ग पर अकेला चलता एक व्यक्ति, चारों ओर घना जंगल और पथरीला रास्ता, संघर्ष और आत्मचिंतन का प्रतीकात्मक दृश्य।

ज़िंदगी

ज़िंदगी जितनी सरल दिखाई देती है, उतनी होती नहीं। यह कविता जीवन के संघर्ष, रिश्तों की बदलती परिभाषा, मोह-माया और मानव अनुभवों की गहराइयों को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है।

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रसोई में काम करती एक भारतीय माँ, चेहरे पर थकान के बावजूद संतोष और ममता की मुस्कान, परिवार के प्रति समर्पण और त्याग को दर्शाता भावनात्मक दृश्य।

माँ होना ही कठिन लगा

माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।

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शब्दों की विहांगी : नीलम पेड़ीवाल

नीलम पेड़ीवाल “विहांगी” हिंदी साहित्य की एक सक्रिय और बहुआयामी रचनाकार हैं। इस विशेष साक्षात्कार में उन्होंने अपने साहित्यिक सफर, लेखन प्रेरणा, संघर्ष, उपलब्धियों और नए रचनाकारों के लिए महत्वपूर्ण संदेश साझा किए हैं।

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मोर मुकुट धारण किए भगवान श्रीकृष्ण, हाथ में बांसुरी, वृंदावन के कुंजों में राधा और गोपियों के साथ दिव्य रासलीला का मनमोहक दृश्य।

श्री कृष्ण

ज बिहारी श्रीकृष्ण की दिव्य महिमा, राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और वृंदावन की रासलीला का सुंदर काव्यात्मक चित्रण। माखनचोर नंदलाल की बाल लीलाओं से लेकर उनके मनमोहक स्वरूप तक, यह कविता भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद का मधुर संदेश देती है। श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और समर्पण से ओतप्रोत यह रचना भक्तों के हृदय को भाव-विभोर कर देती है।

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चोर को पकड़ने के बाद भी भूख के डर से जूझता एक गरीब मजदूर शंभू

डर

चोर को पकड़ने वाला साहसी शंभू किसी इंसान से नहीं डरता, लेकिन जब पत्नी उससे उसके सबसे बड़े डर के बारे में पूछती है, तो उसका उत्तर समाज की सबसे कड़वी सच्चाई उजागर कर देता है—भूख।

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अपने परिवार के साथ खड़े एक स्नेही और संघर्षशील भारतीय पिता का भावपूर्ण दृश्य, जो प्रेम, त्याग, सुरक्षा और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक है।

पिता का प्रेम

पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि परिवार की नींव, विश्वास का स्तंभ और त्याग का दूसरा नाम हैं। प्रस्तुत है पिता के प्रेम, संघर्ष और समर्पण को समर्पित एक हृदयस्पर्शी कविता।

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नौतपा की तपती दोपहर में धूप से झुलसी सड़क, गर्म हवाएं और गर्मी से बचाव के पारंपरिक पेय दर्शाता दृश्य

नौतपा

नौतपा की तपती दोपहरी, लू की मार और गर्मी से राहत के घरेलू उपाय इन सबको सरल लोकभाषा और सहज भाव में प्रस्तुत करते ये दोहे मौसम का चित्र भी उकेरते हैं और सावधानी का संदेश भी देते हैं।

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