Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
मोर मुकुट धारण किए भगवान श्रीकृष्ण, हाथ में बांसुरी, वृंदावन के कुंजों में राधा और गोपियों के साथ दिव्य रासलीला का मनमोहक दृश्य।

श्री कृष्ण

ज बिहारी श्रीकृष्ण की दिव्य महिमा, राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और वृंदावन की रासलीला का सुंदर काव्यात्मक चित्रण। माखनचोर नंदलाल की बाल लीलाओं से लेकर उनके मनमोहक स्वरूप तक, यह कविता भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद का मधुर संदेश देती है। श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और समर्पण से ओतप्रोत यह रचना भक्तों के हृदय को भाव-विभोर कर देती है।

Read More
चोर को पकड़ने के बाद भी भूख के डर से जूझता एक गरीब मजदूर शंभू

डर

चोर को पकड़ने वाला साहसी शंभू किसी इंसान से नहीं डरता, लेकिन जब पत्नी उससे उसके सबसे बड़े डर के बारे में पूछती है, तो उसका उत्तर समाज की सबसे कड़वी सच्चाई उजागर कर देता है—भूख।

Read More
अपने परिवार के साथ खड़े एक स्नेही और संघर्षशील भारतीय पिता का भावपूर्ण दृश्य, जो प्रेम, त्याग, सुरक्षा और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक है।

पिता का प्रेम

पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि परिवार की नींव, विश्वास का स्तंभ और त्याग का दूसरा नाम हैं। प्रस्तुत है पिता के प्रेम, संघर्ष और समर्पण को समर्पित एक हृदयस्पर्शी कविता।

Read More
नौतपा की तपती दोपहर में धूप से झुलसी सड़क, गर्म हवाएं और गर्मी से बचाव के पारंपरिक पेय दर्शाता दृश्य

नौतपा

नौतपा की तपती दोपहरी, लू की मार और गर्मी से राहत के घरेलू उपाय इन सबको सरल लोकभाषा और सहज भाव में प्रस्तुत करते ये दोहे मौसम का चित्र भी उकेरते हैं और सावधानी का संदेश भी देते हैं।

Read More
घर में महसूस होती माँ की उपस्थिति और ममता को दर्शाती भावनात्मक हिंदी कविता का दृश्य

शायद माँ आयी है

‘शायद माँ आई है’ एक ऐसी भावनात्मक कविता है जिसमें माँ सीधे दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी आदतें, सहेजने का ढंग और प्रेम घर के हर कोने में महसूस होता है। यह कविता मातृत्व की उस अनकही उपस्थिति को शब्द देती है जो हमेशा साथ रहती है।

Read More
नारी के मौन, संघर्ष और आत्मसम्मान को दर्शाती भावनात्मक हिंदी कविता का दृश्य

मौन

‘मौन’ स्त्री जीवन की उस पीड़ा और संघर्ष की कविता है, जहाँ सदियों से लादी गई अपेक्षाएँ, रिश्तों के बोझ और पहचान की तलाश एक तीखा प्रश्न बनकर उभरते हैं। यह कविता नारी की चुप्पी नहीं, उसके भीतर के प्रतिरोध और आत्मसम्मान की आवाज़ है।

Read More
आत्मविश्वास से खड़ी एक भारतीय महिला, हाथ में किताब और कलम लिए, स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का प्रतीक भाव लिए हुए।

हाँ, मैं एक स्त्री हूँ…

यह कविता उस स्त्री की आवाज़ है जो समाज की परिभाषाओं से परे अपनी पहचान खुद गढ़ना चाहती है। संघर्ष, आत्मविश्वास और स्वाभिमान से भरी यह रचना स्त्री-अस्तित्व की सशक्त अभिव्यक्ति है।

Read More
क़तर के समुद्र किनारे सूर्यास्त के बीच खड़ी एक भारतीय महिला, जो तन्हाई, यादों और प्रेम की नई उम्मीदों में खोई हुई है।

चलते रहने का नाम ज़िंदगी

क़तर में अकेली ज़िंदगी जी रही मान्या परिवार की जिम्मेदारियों के बीच खुद को भूल चुकी थी। तन्हाई, पुराने प्रेम की स्मृतियाँ और नए रिश्ते के डर के बीच जब जीवन ने उसे प्रेम का दूसरा अवसर दिया, तब उसे समझ आया कि चलते रहने का नाम ही ज़िंदगी है।

Read More
शिर्डी यात्रा और हिंदी साहित्यिक अधिवेशन में शामिल साहित्यकारों और साथियों के साथ बिताए आत्मीय और यादगार पल।

यात्रा, जो लौटकर भी साथ रही

हिंदी साहित्य भारती के शिर्डी अधिवेशन की यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मित्रता, आत्मीयता, जिम्मेदारियों और यादों से भरा जीवन का सुंदर अनुभव बन गई।

Read More
दो रास्तों के बीच खड़ा एक चिंतनशील व्यक्ति, इच्छा और ईश्वर की इच्छा के बीच आंतरिक संघर्ष को दर्शाता आध्यात्मिक दृश्य।

इच्छा और ईश्वर का संघर्ष

इच्छा और ईश्वर का संघर्ष’ एक गहन आध्यात्मिक लेख है, जो मनुष्य की अनंत इच्छाओं, ईश्वर की व्यवस्था और समर्पण के भाव के बीच के सूक्ष्म संबंध को समझाने का प्रयास करता है। यह लेख बताता है कि हर अधूरी इच्छा केवल अभाव नहीं, कई बार जागरण का मार्ग भी होती है।

Read More