अहंकार 

अहंकार की साया:

अंशु गुप्ता, सिलीगुड़ी (पश्‍चिम बंगाल)

उसने खुद अपराध कर
मुझ पर दोष डाल दिया,
पता नहीं परमात्मा, मुझसे ऐसा क्या अपराध हो गया।

अनुभव के लिए हर एक भाव आता है,
पर उसके भीतर अहंकार आ गया,
और मेरे ऊपर दुख का बड़ा पहाड़ आ गया।

उसने दर्द होने का असर डाला,
पर मैंने अपनी मंजिल पाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

उसके पास एक शक्ति थी,
उसने न ही मुझे अस्त्र से मारा,
न ही शास्त्र से मारा,
उसने मुझे अपनी जुबान से ही मार डाला।

उसके पास अंदरूनी जुबान की शक्ति थी,
पर मेरे पास सच्ची ईश्वर भक्ति थी।

जब उस पर अहंकार की साया आई,
तो मुझ पर दुख की छाया आ गई।

खुद कपटी होकर उसने अपने आप को भीष्म मान लिया,
मैंने तो चुप्पी साधी, फिर भी मुझे शकुनि बना दिया।

मैंने तो उस पर विश्वास किया था,
पर उसने इस शब्द के साथ ‘घात’ शब्द भी जोड़ दिया।

लेखिका के बारे में
अंशु गुप्ता
हिंदी साहित्य जगत की एक संवेदनशील और सशक्त कवयित्री हैं, जिनकी लेखनी में भावनाओं की गहराई, सामाजिक चेतना और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। दार्जिलिंग इकाई में सचिव के रूप में सक्रिय रहते हुए वे साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
प्रहरी मंच, महिला काव्य मंच और चैतन्य काव्य मंच जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से जुड़कर उन्होंने अपनी रचनात्मक पहचान को व्यापक मंच प्रदान किया है।उनकी कविताएँ नियमित रूप से दैनिक विश्वमित्र जैसे समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रही हैं, वहीं लिटरेरी सोसाइटी की बहुभाषी (पोलिग्लोट) पत्रिका में भी उनकी रचनाओं को स्थान मिला है।

अंशु गुप्ता की लेखनी को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया है, जिनमें पश्चिम बंगाल हिंदी अकादमी का पुरस्कार, ‘कलमकार 2024’ सम्मान, मोहन लाल जैन सम्मान, विद्यापति मंच सम्मान, महाकाव्य रश्मि रथी सम्मान तथा सिलीगुड़ी लिटरेरी सोसाइटी का पुरस्कार प्रमुख हैं। उनकी रचनात्मक यात्रा केवल लेखन तक सीमित नहीं है। डॉ. सत्या होप टॉक के यूट्यूब मंच पर उनका काव्य पाठ प्रसारित हो चुका है और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी कविताओं का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण कर चुकी हैं।

काव्य लेखन के साथ-साथ अध्ययन, नृत्य कला, चित्रकला और मंच संचालन में उनकी विशेष रुचि है, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाती है। उनकी कविताओं के प्रमुख विषयों में स्त्री विमर्श, भक्ति और पौराणिक कथाएँ शामिल हैं, जिनके माध्यम से वे समाज और संवेदनाओं को एक नई दृष्टि प्रदान करती हैं। अंशु गुप्ता की रचनाएँ केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों, संवेदनाओं और आत्मिक चेतना का जीवंत प्रतिबिंब हैं।

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