gulmohar

लहरों सी मेरी यादें…

चांदनी रात में समुद्र किनारे खड़ा एक अकेला व्यक्ति क्षितिज की ओर देख रहा है। किनारे से टकराती लहरें, गीली रेत पर पदचिह्न और शांत वातावरण प्रेम, यादों और विरह की भावनाओं को दर्शा रहे हैं।

सुनीता माथुर, पुणे

लहरों सी मेरी यादें और… तुम,
जैसे चाँदनी से भीगी कोई धुन।
जैसे समंदर की गोद में छिपा गीत,
जैसे मुस्कुराती हुई शाम का नज़ारा।

समंदर की खामोश गहराइयों में
अब भी गूँजता है तुम्हारा संगीत।
हर लहर आकर पूछती है, जनाब,
कहाँ खो गए वो हँसते-खेलते पल।

लहरों सी मेरी यादें और… तुम,
रेत पर लिखे थे जो सुनहरे सपने,
वक्त ने धो दिए बेरहमी से बनकर जल,
हवा उन्हें चुपके से पढ़कर निकल जाती है।

हर लहर दिल के किनारे से टकराकर
दिल पर तुम्हारा नाम लिख जाती है।
भीगी-भीगी शाम की तन्हाई में
इस दिल को तेरी याद बहुत सताती है।

लहरों सी मेरी यादें और… तुम,
तुम दूर खड़े साहिल जैसे निहारते हो,
जो हर बार मुझे अपने पास बुलाता है,
मगर फिर भी फ़ासले दूर रह जाते हैं।

मेरी यादें भी उन लहरों जैसी हैं
कभी चंचल, कभी शांत,
कभी बेचैन, कभी सुकून।

मुझे लगता है, मेरे दिल की हर लहर में
बस मेरी यादें… और… तुम!
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