“मुझे फ़र्क नहीं पड़ता”
कभी किसी की मौजूदगी सुकून देती है, लेकिन उसकी गैरमौजूदगी जिंदगी को रोक नहीं पाती। यह कविता प्रेम, आत्मनिर्भरता, तन्हाई और खामोशी के उसी खूबसूरत एहसास को शब्द देती है।

कभी किसी की मौजूदगी सुकून देती है, लेकिन उसकी गैरमौजूदगी जिंदगी को रोक नहीं पाती। यह कविता प्रेम, आत्मनिर्भरता, तन्हाई और खामोशी के उसी खूबसूरत एहसास को शब्द देती है।
कुछ यादें समंदर की लहरों जैसी होती हैं। वे बार-बार दिल के किनारे से टकराती हैं और किसी अपने का नाम फिर से लिख जाती हैं। यह कविता प्रेम, विरह और उन यादों की कहानी है, जो समय बीत जाने के बाद भी दिल में जीवित रहती हैं।