तेरे होने और मेरे न होने के बीच | एक प्रेम कविता

तेरे होने, मेरे न होने के बीच

कुछ रिश्ते नाम से नहीं, एहसासों से जिए जाते हैं। यह कविता प्रेम, स्मृतियों, आगोश और उस अनकहे खालीपन की कहानी है, जहाँ “तेरे अलावा” और “तेरे बिना” एक साथ सांस लेते हैं।

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चाँदनी रात और मंद समीर के बीच प्रेम और यादों में खोए दो लोगों का भावनात्मक दृश्य।

मनवा खाए हिचकोले

मनवा खाए हिचकोले” एक ऐसी प्रेम कविता है जिसमें समीर, यादों की खुशबू, चाँदनी और धड़कनों के माध्यम से प्रेम की कोमल अनुभूतियों को अभिव्यक्ति मिली है।

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मंद मुस्कान के साथ खड़ी एक युवती, जिसकी आँखों में बचपन और प्रेम की मासूम यादें झलक रही हैं।

लम्हा

कुछ रिश्ते उम्र नहीं, एहसास जीते हैं। “लम्हा” कविता सोलह-सत्रह की मासूमियत, बचपन की खुशबू और प्रेम की कोमल मुस्कुराहटों को बेहद संवेदनशीलता से उकेरती है।

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अपने बचपन के प्रेम और पुरानी यादों में खोई एक युवती, धूप भरे माहौल में पुराने घर की ओर भावुक नज़रों से देखते हुए।

सब कुछ याद है मुझे

विजया डालमिया, हैदराबाद वो हमारा दीवानापन थाया बचपन की मोहब्बत,जिसे दोस्ती का नाम देकरकरते थे हर पल शरारत। बड़े होने पर भीसब कुछ याद है मुझे…. छोटी-छोटी ज़िद, छोटी-छोटी तकरार,देती थी लंबी-सी खुशी।वो तपती धूप मेंएकटक उसके घर की ओर ताकते रहना,उसकी एक झलक पाने के लिए। पैरों में पड़े फफोलों को देखकरउसका मुझे डाँटना,और…

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बारिश भरी शाम में खिड़की के पास बैठा एक व्यक्ति डायरी में भावुक शायरी लिखता हुआ दिखाई दे रहा है, पास में जलती मोमबत्ती और वातावरण में प्रेम, शिकायत और अपनत्व की गहरी भावनाएं महसूस हो रही हैं।

तोहमत लगा दीजिए

“तोहमत लगा दीजिए” प्रेम, शिकायत और अपनत्व की भावनाओं से सजी एक नाज़ुक ग़ज़ल है, जिसमें रिश्तों की मिठास और दिल की गहराइयों को खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।

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खिड़की के पास खड़ी सांवली भारतीय महिला, चेहरे पर शांति और प्रेम की अनुभूति, कंधों पर पड़ती हल्की धूप।

देह पर ठहरा मौसम !!

“देह पर ठहरा मौसम!!” एक ऐसी संवेदनशील कविता है जिसमें प्रेम के प्रथम स्पर्श, स्मृतियों की गर्माहट और आत्मा तक उतरती अनुभूतियों को बेहद कलात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है।

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पुरानी छत पर सूखते कपड़े, दर्पण और बिखरे फूलों के साथ यादों से भरा भावनात्मक दृश्य

यादें…

यह कविता यादों की उस दुनिया को शब्द देती है, जहाँ प्रेम, बिछड़न और बीते पलों की महक आज भी जीवित है। सूखे फूलों, होली के रंगों और बारिश की स्मृतियों के माध्यम से मन में छिपी भावनाओं को बेहद मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है।

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लंबे समय बाद मिलते हुए दो लोग, भावनात्मक और रोमांटिक माहौल

यूँ ही तो नहीं

कुछ मुलाकातें सिर्फ इत्तेफ़ाक़ नहीं होतीं, वे किस्मत की लिखी कहानी होती हैं। “यूँ ही तो नहीं” एक ऐसी ही ग़ज़ल है, जो इश्क़ और तक़दीर के अनोखे रिश्ते को उजागर करती है।

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