मनवा खाए हिचकोले
मनवा खाए हिचकोले” एक ऐसी प्रेम कविता है जिसमें समीर, यादों की खुशबू, चाँदनी और धड़कनों के माध्यम से प्रेम की कोमल अनुभूतियों को अभिव्यक्ति मिली है।

मनवा खाए हिचकोले” एक ऐसी प्रेम कविता है जिसमें समीर, यादों की खुशबू, चाँदनी और धड़कनों के माध्यम से प्रेम की कोमल अनुभूतियों को अभिव्यक्ति मिली है।
विजया डालमिया, हैदराबाद वो हमारा दीवानापन थाया बचपन की मोहब्बत,जिसे दोस्ती का नाम देकरकरते थे हर पल शरारत। बड़े होने पर भीसब कुछ याद है मुझे…. छोटी-छोटी ज़िद, छोटी-छोटी तकरार,देती थी लंबी-सी खुशी।वो तपती धूप मेंएकटक उसके घर की ओर ताकते रहना,उसकी एक झलक पाने के लिए। पैरों में पड़े फफोलों को देखकरउसका मुझे डाँटना,और…
“तोहमत लगा दीजिए” प्रेम, शिकायत और अपनत्व की भावनाओं से सजी एक नाज़ुक ग़ज़ल है, जिसमें रिश्तों की मिठास और दिल की गहराइयों को खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।
“देह पर ठहरा मौसम!!” एक ऐसी संवेदनशील कविता है जिसमें प्रेम के प्रथम स्पर्श, स्मृतियों की गर्माहट और आत्मा तक उतरती अनुभूतियों को बेहद कलात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है।
कुछ मुलाकातें सिर्फ इत्तेफ़ाक़ नहीं होतीं, वे किस्मत की लिखी कहानी होती हैं। “यूँ ही तो नहीं” एक ऐसी ही ग़ज़ल है, जो इश्क़ और तक़दीर के अनोखे रिश्ते को उजागर करती है।
“सुनो साहिब” एक कोमल और गहरी भावनाओं से भरी कविता है, जो प्रेम के उस एहसास को व्यक्त करती है जहाँ दो दिल धीरे-धीरे एक-दूसरे में समाने लगते हैं। यह रचना बताती है कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हर सांस, हर धड़कन और हर ख्वाब में बस जाता है। जब मोहब्बत अपनी गहराई पर पहुँचती है, तो इंसान खुद को भी अपने प्रिय के भीतर खोजने लगता है। यह कविता समर्पण, अपनापन और आत्मीय जुड़ाव की खूबसूरत अभिव्यक्ति है।
“मेरी ख़ामोशियाँ पढ़ लो तुम” एक बेहद भावनात्मक हिंदी कविता है, जो अनकहे जज़्बातों और रूहानी प्रेम की गहराई को खूबसूरती से व्यक्त करती है। यह कविता उन भावनाओं की कहानी है, जिन्हें शब्दों में कहना मुश्किल होता है, लेकिन दिल उन्हें गहराई से महसूस करता है।