सरस्वती वंदना
हे स्वामिनी, ज्ञानदायिनी, भक्ति-प्रकाश उर में भर दे। माँ सरस्वती से ज्ञान, विवेक, संयम और शुद्ध लेखनी का वरदान माँगती यह सुंदर वंदना मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

हे स्वामिनी, ज्ञानदायिनी, भक्ति-प्रकाश उर में भर दे। माँ सरस्वती से ज्ञान, विवेक, संयम और शुद्ध लेखनी का वरदान माँगती यह सुंदर वंदना मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।
मध्यप्रदेश लेखक संघ उज्जैन द्वारा हिन्दी व्यंग्य के प्रख्यात हस्ताक्षर शरद जोशी की स्मृति में आयोजित व्यंग्य गोष्ठी में साहित्य जगत के कई वरिष्ठ लेखक और व्यंग्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रेस क्लब, उज्जैन में किया गया, जिसमें व्यंग्यकारों ने शरद जी के अद्भुत साहित्यिक योगदान और उनके सामाजिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार और विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने कहा कि शरद जोशी सम्पूर्ण व्यंग्य परम्परा के विलक्षण व्यंग्यकार थे। उनके व्यंग्य में विषयों का वैविध्य था और वे आम जीवन के सामान्य विषयों को भी बड़े प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते थे।