Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
वीणा धारण किए श्वेत कमल पर विराजमान माँ सरस्वती का दिव्य और शांत स्वरूप।

सरस्वती वंदना

हे स्वामिनी, ज्ञानदायिनी, भक्ति-प्रकाश उर में भर दे। माँ सरस्वती से ज्ञान, विवेक, संयम और शुद्ध लेखनी का वरदान माँगती यह सुंदर वंदना मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

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शब्दों में बंधा मेरा दिल

तुम्हारी लिखी हर पंक्ति ने मुझे भीतर तक छू लिया। तुम्हारे शब्दों में गंभीरता और स्त्री‑सम्मान की झलक थी। धीरे‑धीरे तुम्हारा व्यक्तित्व मेरे मन में उतर गया, और अब मुझे लगता है कि मैं तुम्हारी लेखनी की प्रेयसी बन चुकी हूँ। हर रोज़ तुम्हारा लिखा पढ़ना, मेरे लिए एक नयी दुनिया की खोज और प्रेम का अनुभव है।

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मौन रात्रि और स्वप्निल वेदना

अँखियाँ रात भर प्रेमिल स्वप्नों में जागती रहीं और रात भोर की प्रतीक्षा में ठहरी रही। मौन ओढ़े मानिनी-सी पीड़ा सहती रही, मगर अपनी वेदनाएँ किसी से न कह सकी और गरल पीकर भी चुप रही। भावनाओं के पारिजात बिखेरकर, श्वेत वस्त्रों में सजी वह सुरभित यामिनी को पीछे छोड़ चली गई।

श्यामल मेघों से घिरी रात में दीपशिखा मद्धम पड़ गई और अमावस की निस्तब्धता में झरती रही चाँदनी। उसके अंतर्मन की कोमलता ओस की बूँदों-सी पारदर्शी थी। वही मधुरिमा उसकी लेखनी से बही और हृदय के फूलों-सी कोमल पंक्तियों में खिल उठी।

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