शिक्षक
ईश्वर से ऊँचा स्थान तुम्हारा
ईश्वर से ऊँचा स्थान तुम्हारा, देते हो सबको सद्ज्ञान।किसी तरह का भेद न करते, तुम पर हमको अभिमान।। जो भी आया शरण तुम्हारी, उसको तुमने अपनाया।जड़-मूरख मन में भी, तुमने ज्ञान का दीप जलाया।सदा सिखाया बच्चों को करना आदर-सम्मान।ईश्वर से ऊँचा स्थान तुम्हारा, देते हो सबको सद्ज्ञान।किसी तरह का भेद न करते, तुम पर हमको…
राधाकृष्णन की रोशनी में आज का अँधेरा पढ़ना
आज हम शिक्षक दिवस मनाते हैं—पर यह महज़ कैलेंडर की औपचारिक तारीख़ नहीं, एक विचार की परीक्षा है। इस दिन का अर्थ तभी पूरा होता है जब हम डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को किताबों के अध्याय से बाहर निकालकर अपने समय की नब्ज़ पर रख दें। वे केवल दार्शनिक, कुलपति या भारत के दूसरे राष्ट्रपति नहीं…
गुरु का स्पर्श, सफलता का मार्ग
शिक्षक वास्तव में जीवन के सृजनहार हैं। जैसे कुम्हार कच्ची मिट्टी को चाक पर घुमाकर आकार देता है, वैसे ही शिक्षक बच्चों के कोमल मन को गढ़कर उन्हें दिशा और स्वरूप प्रदान करते हैं। माता-पिता हमें जन्म देते हैं, परंतु चरित्र की नींव और मूल्यों का उपहार शिक्षक ही देते हैं।
शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाते, वे विचारों को नई धार देते हैं और भविष्य को संवारते हैं। वे बच्चों के भीतर आत्मविश्वास जगाते हैं, चुनौतियों का सामना करने की क्षमता पैदा करते हैं और सफलता की ओर बढ़ने का मार्ग दिखाते हैं। जब विद्यार्थी प्रगति पथ पर आगे बढ़ते हैं और नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करते हैं, तो उनकी उपलब्धियों में शिक्षक की मेहनत और प्रेरणा की झलक साफ़ दिखाई देती है।
गुरु की छाया में गढ़ता जीवन
शिक्षक जीवन के आधार स्तंभ होते हैं। जैसे कुम्हार कच्ची मिट्टी को चाक पर घुमाकर नया आकार देता है, वैसे ही शिक्षक बच्चों के कोमल और अबोध मन को गढ़ते हैं। बचपन में माता-पिता से बोलना, चलना और सहारा लेना सीखा जाता है, लेकिन जब शिक्षा के मंदिर में पहला कदम रखा जाता है, तब बच्चा पहली बार माता-पिता का हाथ छोड़कर एक नए वातावरण में प्रवेश करता है।
