
रोहिणी पांडे, प्रसिद्ध लेखिका, नांदेड़
जाग जाओ तो राम हो
माना कि तुम आम हो,
व्यस्त भी सुबह-शाम हो,
विवेकता कुछ सोई सी है
पर जाग जाओ तो राम हो।
माना रावण का वंश बढ़ा है,
हर कदम आकर खड़ा है,
तुम तो संस्कार-धाम हो
जाग जाओ तो राम हो।
कुंभकर्ण-सा मन बना है,
अंतर-राम ही पर तना है,
सत्य पावन अंजाम हो
जाग जाओ तो राम हो।
कहीं जटायु शौर्य दिखाए,
कहीं गिलहरी भक्ति जगाए,
हर धड़कन का नाम हो
जाग जाओ तो राम हो।
राम ने वनवास भी पाया,
फिर भी रावण को हराया,
अंतःस्थित सत्कर्म हो
जाग जाओ तो राम हो।
रामराज्य की अभिलाषा है,
आदर्शों की परिभाषा है,
अधर्म सदा नाकाम हो
जाग जाओ तो राम हो।
थोड़े-थोड़े बिगड़ गए हो,
आदर्शों से मुखर गए हो,
मन जीते वही संग्राम हो
जाग जाओ तो राम हो।
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