
रीता मिश्रा तिवारी, प्रसिद्ध लेखिका, भागलपुर (बिहार)
गीत एक गरीब घराने से थी। माता-पिता का साथ बचपन में ही छूट गया था।
चाचा-चाची के घर उसका लालन-पालन हुआ। उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी। चाची स्वभाव से थोड़ी कड़क थीं, और पैसों के मामले में भी हाथ तंग था।
किसी से काम लेना हो, तो कोई चाची से सीखे।
वह नहीं चाहती थीं कि गीत आगे पढ़े।
लेकिन गीत हर काम में निपुण थी। वह सिर्फ नाम की “गीत” नहीं थी—उसकी आवाज़ इतनी मीठी और सुरीली थी कि लगता जैसे ईश्वर ने उसके कंठ में मिस्री घोल दी हो।
लोग कहते—जैसे Lata Mangeshkar का पुनर्जन्म हो।
घर के सारे काम निपटाकर वह स्कूल जाती रही… और एक दिन कॉलेज भी पहुँच गई।
चाची को बस काम से मतलब था फिर चाहे वह कैसे भी हो।
चाचा, गीत की हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करते थे।
गीत भी अपनी मेहनत से उनका नाम रोशन कर रही थी।
धीरे-धीरे चाची को उसकी कमाई की आदत लग गई।
जब भी शादी की बात उठती, वह बुढ़ापे का हवाला देकर चाचा को चुप करा देतीं।
समय बीतता गया…
गीत की उम्र बढ़ती रही, और चाचा जीवन की सांझ में पहुँच गए।
एक दिन वे पंचतत्व में विलीन हो गए।
अब गीत की उदासी पूछने वाला कोई नहीं था।
चाची का समय मोहल्ले की पंचायत में बीतता, और गीत—घर और ऑफिस के बीच पिसती रहती।
उसकी दिनचर्या नीरस और थकान से भरी थी।
एक दिन ऑफिस के पास ही पार्क में, एक पेड़ के नीचे वह चुपचाप बैठ गई।
चारों ओर लोग अपनी-अपनी दुनिया में मग्न थे।
जब उसने ऊपर देखा—तो वह गुलमोहर का पेड़ था।
उसे याद आया—पीला गुलमोहर उसे बचपन से कितना प्रिय था…
पापा ने आँगन में लगाया था… पर उनके जाने के बाद चाची ने उसे कटवा दिया था।
आँखों में आँसू भर आए ही थे कि-“आप रो रहे हो…?”
एक नन्हा सा बच्चा उसके हाथ में गुलाब थमाते हुए बोला।
गीत चौंककर उसकी ओर देखने लगी।उसकी तोतली भाषा, मासूम चेहरा और प्यारी मुस्कान ने जैसे दिल का सारा बोझ हल्का कर दिया।“मुझे फूल क्यों दिया?”“पापा कहते हैं मुस्कान सबसे अच्छा उपहार होता है!”इतना कहकर वह दौड़ गया।
गीत समझ गई ज़िंदगी में छोटी-छोटी चीज़ें भी बड़ा सुकून दे जाती हैं। अब वह रोज़ उस पार्क में आने लगी-अपनी थकान को मुस्कान में बदलने।एक दिन वही बच्चा फिर आया
“मेरी मम्मी बनोगी… प्लीज़?”
गीत चुप रह गई…
“पापा… आप दो न गुलाब… फिर मुस्कुराएगी… तब बोलेगी!”
उसकी तोतली ज़ुबान और प्यारी मुस्कान पर गीत का दिल आ गया।
वह इंकार न कर सकी।
आज…
गीत के जीवन में थकान नहीं,
सुकून था
एक प्यारी मुस्कान का सुकून।
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