भावनात्मक
प्यारी मुस्कान
यह कहानी गीत नाम की एक युवती की है, जो जीवन की कठिनाइयों और अकेलेपन से जूझ रही होती है। एक दिन पार्क में एक छोटे बच्चे की मासूम मुस्कान और एक गुलाब उसके जीवन में नया उजाला ले आता है। यह कहानी बताती है कि छोटी-छोटी खुशियाँ भी जीवन को बदल सकती हैं और सुकून दे सकती हैं।
राज़-ए-ज़िंदगी
यह ग़ज़ल ज़िंदगी के रहस्यों, प्रेम और अस्तित्व के गहरे एहसासों को बयां करती है। कवि ने “किताब-ए-ज़िंदगी” के रूपक के माध्यम से जीवन के अनसुलझे प्रश्नों और भावनाओं को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। हर शेर जीवन के एक नए पहलू को उजागर करता है।
वह सुबहें, वह होटल, वह जूनून
महिदपुर रोड की शंकर सेठ की होटल, और वहाँ डम्प होने वाले अखबार। बचपन का वह लड़का, जो फिल्मों के पोस्टर और शो टाइम्स जानने के लिए हर दिन सुबह निकल पड़ता।
पहले डर और हिचकिचाहट के साथ, धीरे-धीरे वह परिचितों में ढल गया—रामनिवास मंडोवरा काकाजी, कालू दा, चंद्रकांत जोशी। अखबारों के पन्नों में डूबते हुए उसका जुनून बन गया आदत, और फिर लत।शंकर सेठ की होटल सिर्फ एक जगह नहीं थी. वह वह मंच थी जहाँ बचपन की जिज्ञासा और सपने पत्रकारिता की दुनिया में बदलने लगे
बाबूजी की हाथ घड़ी
मेरे पिताजी एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे, जिनकी तनख्वाह कम थी, लेकिन आत्मसम्मान और ज्ञान कूट-कूट कर भरा था। साल 1974 में उनके तबादले के समय, घर का सारा खर्च उधारी पर चलता था। घर का सामान बैलगाड़ी में शिफ्ट करना था, लेकिन पिताजी ने सबसे पहले 60 रुपए का उधार चुकाया। इसके लिए उन्होंने अपनी प्रिय सुनहरे डायल वाली हैनरी सैंडो घड़ी बेच दी।
जीवन चक्र और अंतिम विदाई
50 वर्षों का साथ, सुख-दुख की साझेदारी और परिवार की खुशियाँ — सब एक क्षण में बदल जाती हैं जब जीवन साथी इस संसार से विदा हो जाता है। यह अनुभव अकेलेपन, स्मृतियों और जीवन के चक्र की गहनता को सामने लाता है। इस लेख में हम एक पति के दृष्टिकोण से उस अंतिम विदाई और जीवन के अनुभवों की झलकियाँ साझा कर रहे हैं, जिन्होंने वर्षों तक परिवार और बच्चों के लिए समर्पण किया।
उससे मिलना
बहुत समय बाद उससे मिलकर मन को एक अजीब सुकून मिला। मैं उसे याद करता था जब वह बहुत छोटी थी — बिल्कुल गुड़िया जैसी। अब वह शादी-शुदा है, पति और बच्चे हैं, और एक खुशहाल जीवन जी रही है। यह देखकर मेरे चेहरे पर स्वाभाविक हँसी खिल उठी।
इतनी सम्पन्नता के बावजूद उसकी फितरत नहीं बदली है। उसकी सम्मोहक और उन्मुक्त हँसी, अविश्वसनीय सरलता और निहायत शालीनता आज भी बरकरार है। मैं सोचता हूँ कि कैसे वह उन मर्यादाविहीन लोगों से निपटती होगी, जो हमारे बीच निशंक घूमते हैं। ऐसे लोग अपने बीच होने पर यह भरोसा दिलाते हैं कि दुनिया आज भी सुन्दर है। उनकी मौजूदगी यह अहसास कराती है कि अच्छाई और बुराई की सतत लड़ाई में अंततः कौन जीतेगा, यह सुनिश्चित है।
प्रेम में पहाड़ होना
प्रेम केवल सहज अनुभव नहीं, बल्कि वह पहाड़ की तरह दृढ़ और विशाल भी हो सकता है। यह मन की गहराई से उत्पन्न होता है, तब जब शब्द भी लवों पर आने में संकोच करते हैं। प्रेम में केवल नदी या सागर की तरंगें नहीं, बल्कि वह इतनी शक्ति रखता है कि व्यक्ति पहाड़ बन जाए। यह केवल प्रेमी और प्रेमिका का रिश्ता नहीं है, बल्कि वह पीड़ा को भी अपने साथ बहा ले जाता है, सूर्य के ताप, चाँद की शीतलता, ऋषियों की तपस्या और हवन की अग्नि की तरह विस्तृत और बलिदानी होता है। प्रेम, त्याग और शिव के तांडव की भांति, कभी शांत, कभी उग्र — लेकिन हमेशा अमर और अडिग है।
नन्हीं डलिया में बताशे
यह कविता बीते दौर की उस मासूमियत और सामाजिक गर्मजोशी को याद करती है, जो अब आधुनिक जीवन की भागदौड़ में खो गई है। कभी गलियों में बच्चों की डुगडुगी, उपवनों में शर्माती कलियाँ, और दोस्तों का एक पुकार पर दौड़ आना — ये सब अब दुर्लभ हो गए हैं। कवि ने भावपूर्ण शब्दों में यह अहसास जताया है कि समय के साथ रिश्तों, संवेदनाओं और सादगी की वो चमक अब धुंधला चुकी है।
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