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उससे मिलना

राकेश चंद्रा, प्रसिद्ध लेखक, लखनऊ

बहुत दिनों के बाद उससे मिलना मन को छू गया;
उसे देखा था जब वह बहुत छोटी थी , बिल्कुल गुड़िया जैसी;
आज वह शादी-शुदा है, पति हैं,
बच्चे भी हैं;
आज वह खुशहाल जीवन जी रही है,
इतना ही काफी है मेरे चेहरे पर
हँसी बिखेरने के लिए।

मैं इसलिए भी खुश हूँ कि इतनी सम्पन्नता के बाद
भी नहीं बदली है उसकी फितरत,
उसकी सम्मोहक उन्मुक्त हँसी,
और अविश्वसनीय सरलता;
आज भी है वह निहायत शालीन —
मैं सोचता हूँ कि
कैसे वह निपटती होगी
उन मर्यादाविहीन लोगों से जो
घूमा करते हैं निशंक हमारे सबके बीच;

अच्छा लगता है ऐसे लोगों को अपने बीच पाकर, जो आश्वस्त करते हैं
कि हमारी दुनिया आज भी सुन्दर है;
उनकी मौजूदगी अहसास कराती है कि
अच्छाई-बुराई की सतत चलने वाली लड़ाई में कौन जीतेगा,
यह सुनिश्चित है।

4 thoughts on “उससे मिलना

  1. हमारी दुनियाँ बहुत खूबसूरत है क्योंकि कुछ सरल , सादगीपूर्ण और बिना शर्त सच्चे मित्र हमारे आसपास हैं ।

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