अनोखा प्यार

तूफ़ान मेल की छुक-छुक के बीच अचानक अर्जुन की नज़र एक जानी-पहचानी खुशबू पर ठहरी वह निशा थी। छह वर्षों का सन्नाटा पलभर में टूट गया। उम्र की सफेदी बालों में उतर आई थी, पर भावनाओं की गरमी अब भी वही थी। कॉलेज के दिनों का प्रेम, एक गलती से टूटा संबंध, और फिर ट्रेन में यूँ अनायास मिलना.दोनों के भीतर दबा हुआ प्यार फिर से जाग उठा। आधी रात की लंबी बातचीत के बाद अर्जुन ने हाथ बढ़ाया-“मेरे साथ उतरना चाहोगी?” निशा ने बिना झिझक अपना हाथ उसके हाथ में दे दिया। पुराने ग़िले धुल गए थे; दो अकेली ज़िंदगियाँ फिर से एक-दूसरे को पा चुकी थीं।

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उससे मिलना

बहुत समय बाद उससे मिलकर मन को एक अजीब सुकून मिला। मैं उसे याद करता था जब वह बहुत छोटी थी — बिल्कुल गुड़िया जैसी। अब वह शादी-शुदा है, पति और बच्चे हैं, और एक खुशहाल जीवन जी रही है। यह देखकर मेरे चेहरे पर स्वाभाविक हँसी खिल उठी।

इतनी सम्पन्नता के बावजूद उसकी फितरत नहीं बदली है। उसकी सम्मोहक और उन्मुक्त हँसी, अविश्वसनीय सरलता और निहायत शालीनता आज भी बरकरार है। मैं सोचता हूँ कि कैसे वह उन मर्यादाविहीन लोगों से निपटती होगी, जो हमारे बीच निशंक घूमते हैं। ऐसे लोग अपने बीच होने पर यह भरोसा दिलाते हैं कि दुनिया आज भी सुन्दर है। उनकी मौजूदगी यह अहसास कराती है कि अच्छाई और बुराई की सतत लड़ाई में अंततः कौन जीतेगा, यह सुनिश्चित है।

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