
आकांक्षा सिंह, प्रसिद्ध लेखिका, जबलपुर
कभी कभी अक़्स देर तक, अपने निहार लेती हूँ
ख्वाहिश होती है माँ की, मैं खुद को निहार लेती हूँ।।
जिसे बस याद किया वो,झट से पास होती है
बस मां ही तो है जो,नहीं कभी जुदा होती है।।
मेरे हर सुख में पास है, जो दुख में पास होती है
बस एक माँ ही तो है जो,हमेशा साथ होती है।।
मेरे हिस्से के दुख सारे ,वो अपने आँचल में समेटे है
कहते हैं जिसको खुदा सभी,वो बस माँ ही होती ।।

खूबसूरत रचना 💖