एहसासों का लावा…

रात के समय खिड़की के पास बैठा एक लेखक, कोरे काग़ज़ पर कलम से भावनाएँ लिखता हुआ

रुचि अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

ख़ुद के ख़यालों की स्याही में घुल जाते हैं,
ये लेखक शब्दों के दायरे से बाहर चले जाते हैं।
उतार देते हैं अपने जज़्बातों को कोरे काग़ज़ पर,
अपने हर अहसास को सुंदर पंक्तियों का मुखौटा पहनाते हैं।

कलम भी साथ मिलकर कुछ ऐसा कमाल दिखाती है,
कोरे काग़ज़ पर अहसासों की बूँदें शब्दों का दरिया बनाती हैं।
लेखक उन शब्दों को जोड़कर कुछ ऐसा सार रचते हैं,
जो श्रोताओं के दिल को छूकर अपनी आसक्ति की मोहर लगाते हैं।

हर लम्हे में जान डालकर
लेखक शब्दों को जीवित करते हैं,
इंद्रधनुषी रंगों-सा जादू
अपने लेख में भरते हैं।

धरती की कोख से जैसे लावा निकल आता है,
एक लेखक का लेख भी वही रूप कहलाता है।
अपनी भावनाओं को जब वह सब तक पहुँचाना चाहता है,
कलम-रूपी घोड़ा ही उसे मंज़िल तक ले जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *