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रात के समय खिड़की के पास बैठा एक लेखक, कोरे काग़ज़ पर कलम से भावनाएँ लिखता हुआ

एहसासों का लावा…

लेखक केवल शब्द नहीं लिखता, वह अपने भीतर उमड़ते भावों को स्याही में घोलकर काग़ज़ पर उतारता है। कलम उसकी भावनाओं का वाहक बनती है और कोरा काग़ज़ अहसासों का सजीव संसार। यही लेखन श्रोताओं के दिल तक पहुँचकर अपनी अमिट छाप छोड़ देता है।

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